Wednesday, May 11, 2016

दहेज़ एक समस्या

आज दहेज़ प्रथा हमारे समाज का एक ऐसा दीमक बन गया है जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। अगर घर में लड़की जन्म लेती है तो कुछ घरो में तो लोग उसकी परवरिश से ज्यादा चिंता उसकी शादी के दहेज़ के लिए करने लगते है । कुछ लोग तो सोचते है की बस कुछ ले दे के लड़की की शादी कर दो बस उनकी जिम्मेदारी ख़तम । और यही कारण है की आज दहेज़ हत्या दिन ब दिन बढ़ रही है । सरकार को इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए क्योंकि महिलाओ पर हो रहे अत्याचार पर अंकुश लगाया जाय।


(फ़ोटो इंटरनेट)

एक आंकड़े के अनुसार दहेज़ हत्याए पहले से कुछ ज्यादा ही बढ़ी है इसके अनुसार 2007 से  2011 के बिच काफी हद तक नए मामले सामने आये है। 2012 में 2833 दहेज हत्या के मामले सामने आये । जो की 2011 में 2618 थी,2013 में ये बढ़कर 10709 हो गयी।अगर औसतन बात करे तो हर एक घण्टे में एक महिला की दहेज़ को लेकर हत्या होती है । जो की बहुत ही शर्मिंदगी की बात है। समाज में काफी कुछ बदल गया लेकिन ये दहेज़ प्रथा न बदल पाये ।


दहेज़ लेना या देना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ कार्यवाही भी होती है और अगर ऐसी कोई घटना हो तो उसकी शिकायत अवश्य कराये क्योंकि कभी कभी समाज के डर से बहुत सी महिलाये अपने साथ होने वाले दहेज़ उत्पीड़न को अपने परिवार या जानने वाले को नही बता पाती है और इसका फायदा  वो लोग उठाते है जो दहेज़ के भूखे होते है वो महिलाओ को मानसिक और शारीरिक रूप से कष्ट देते है जो की कानूनन अपराध है । महिलाओ के लिए सरकार द्वारा कई कारगर कदम उठाये जा रहे है । उसके बाद भी अगर ऐसी घटनाये होती है कितने शर्म की बात है लोग बदलाव की बात करते है लेकिन खुद को नही बदलते क्योंकि जब आप बदलेंगे तभी समाज बदलेगा।
keep change

Sunday, May 8, 2016

MOTHER DAY

आज मदर डे है और ये कोई बताने की बात नही है की माँ बच्चों के दिल में एक खास जगह रखती है। माता,माँ,मॉम,मम्मी नाम अनेक लेकिन रिश्ता और स्नेह एक ही है। मदर डे हर साल मई में दूसरे सफ्ताह के रविवार को मनाया जाता है। जिसको लोग अपनी अपनी तरह से मानते है। एक माँ 100 शिक्षको से ज्यादा ज्ञान अपने बच्चे को देती है और कहा जाता है की माँ ही बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है। 


(फ़ोटो इंटरनेट)

माँ के किरदार को हमारे सिनेमा ने भी खूब सराहनीय ढंग से पेश किया है । समय समय पर ऐसी फिल्में आती है जिसमे माँ का किरदार काफी दमदार और भावनात्मक होता है । मदर इन्डिया से लेकर निल बटे सन्नाटा तक फिल्मो में माँ की एक अहम् भूमिका रही है 50-60 के दशक में माँ का किरदार फिल्मो में काफी महत्वपूर्ण रहता था और दिवार फ़िल्म का डाइलॉग "मेरे पास माँ है" आज भी लोगो के जहन में ज़िंदा है ।
















(फ़ोटो इंटरनेट)
माँ तो माँ ही होती है लेकिन समय के साथ साथ आजकल माँ ने आधुनिक माँ का रूप ले लिया है जो की अपने बच्चों की माँ के साथ एक अच्छी मित्र भी है । क्युकी जिस तरह से डिजिटलाइजेसन बढ़ा है माँ ने अपने बच्चों का साथ दिया है।
क्योंकि जब कोई संकट आती है तो पहले माँ ही याद आती है और कहीं न कहीं इंसान की सफलता में उसकी माँ का अहम् रोल होता है।माँ ही हमे बचपन में अच्छे बुरे की पहचान बताती है और एक सही मार्गदर्शक का रूप निभाती है ।
आप कितना भी अच्छा खाना खाते हो लेकिन माँ के हाथ के खाने की बात ही कुछ और होती है। यहाँ ये कहना गलत नही होगा की भगवान ने अपनी जगह माँ को हमारे बिच भेजा है। जीवन में सफलता पानी है तो अपनी माँ के द्वारा दिखाए मार्ग पर चले सफलता अवश्य मिलेगी। माँ के विषय में जितना लिखो उतना ही कम हैं। 

Friday, May 6, 2016

swach bharat abhiyan

हमे अपने वातावरण को साफ सुथरा रखना चाहिए ये तो सब जानते है लेकिन इस बात पर अमल कौन करता है । और अगर सही कहे तो हमारे समाज में गंदगी की भी एक जगह बन गयी है या ये कह सकते है की गन्दगी की भी समाज में जगह है ।हमे कुछ देखने को मिले न मिले कहीं न कहीं कचरे का ढेर लगा जरूर दिखेगा, बस उनकी शक्ल या फिर मात्रा अलग अलग हो सकती है । और इस परेशानी से निपटने के लिए ही हमारे देश के प्रधानमंत्री ने देश में स्वछ भारत अभियान की शुरुआत की। शुरूआती दौड़ में बड़े नामी गिरामी लोगो ने बढ़ चढ़ क़र सफाई अभियान में हिस्सा लिया । जो की बहुत ही गर्व की बात है । लेकिन दुख की बात यह है की कुछ लोगो ने शुरूआती दिनों में एक या दो दिन इस अभियान में सफाई करते हुए अपनी फ़ोटो मिडिया में और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे शेयर की । और कुछ ने तो साफ जगह को ही साफ डाला और कुछ ने तो बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और यह सही भी है और कहीं न कहीं बदलता और स्वछ भारत नज़र भी आ रहा था लेकिन अब काफी दिन बीत जाने के बाद कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी को भुल गए है ये स्वछ भारत अभियान किसी एक का नही है ये पुरे देश के लिए और हर एक नागरिक के उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की हमारे देश के लिए ।
लेकिन कुछ लोग कहते है की ये मेरा काम थोड़े ही है लेकिन क्या वो अपने घर को साफ नही करते ।
स्वछ भारत के अभियान को सफल बनाये काफी दिन से मुझे लग रहा हैं कि  कही फिर से लोग भूल तो नही गए इस अभियान को अपनी जिम्मेदारियों को समझे और स्वछ बनाने में अपने देश का साथ दे।
कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारा शहर अचानक  बहुत साफ दिखने लगता है तो हम आपस में पूछते है की क्या कोई आने वाला है क्या? जैसे कोई मंत्री या बड़ा नेता । क्योंकि जब कोई शहर में आने वाला होता है तो सड़क से लेकर नुक्कड़ तक साफ़ करवा दिए जाते है तो आने वाले को पता ही नही चल पता की शहर में गन्दगी है या नही । लेकिन क्या ये बिना किसी के आये रोज़ नही हो सकता ? हो सकता है लेकिन कोई अपनी जिम्मेदारियो को समझता नही ।
जो कहीँ कचरा फेके उसे एक बार कूड़ेदान में डालने के लिए टोंकें जरूर मुझे विश्वास है की वो अगली बार कचरा इधर उधर फेकने से पहले सोचेगा जरूर।

Saturday, April 30, 2016

LABOUR DAY

आज मजदूर दिवस  है क्या हम जानते है की ये मजदूर दिवस क्यों और कब से मनाया जाता है।  कोई नहीं चलिए मैं  बताता हूँ ,मजदूर दिवस की शुरुआत 1886 में शिकागो में उस समय हुई जब मजदूर मांग कर रहे  थे कि काम की अवधि 8 घंटे हो और सप्ताह में एक दीं छुट्टी हो। इस हड़ताल में एक अज्ञात व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और फिर पुलिस फायरिंग में कुछ मजदूरों की मौत हो गई और कुछ पुलिस  अफसर भी मारे गए। इसके बाद 1889 में पेरिस महासभा की द्रितीय  बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारीत  किया गया की एक मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए उसी समय से दुनिया के 80 देशो में 1  मई को राष्ट्रिय अवकाश घोषित हुआ।









मजदूरी का अर्थ सेवा है ,सेवा  प्रदान करने वाला व्यक्ति ही मजदूर कहलाता है। काम करने वाला व्यक्ति चाहे खेत हो या फिर सड़क या कोई ऑफिस वो मजदूर की श्रेणी में ही आता है। क्योकि हर महीने मालिक द्वारा दिए जाने वाले वेतन पर निर्भर होता है क्युकी वो उनके लिए काम करता है। बहुत से लोग मजदूर दिवस के इतिहास से अंजान है। भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1923 में मनाया गया। जिसका सुझाव सिंगार वेलुचेट्टियर नाम के एक  कम्युनिष्ट  नेता ने   किया।

आज मजदूरों की दशा सोचनीय है क्योंकि उनको  मेनहत   के अनुसार भत्ता नहीं मिल पा  रहा। अभी मैं फ़िलहाल इतना ही  चाहूंगा क्युकी आज श्रमिक दिवस है और मैं नकारात्मक लेख नहीं लिखना चाहता।  

Monday, October 5, 2015

ये है राजनीती




हमारा देश भारत जहाँ एक तरफ हम नई उचाइयों को छू रहा है पूरे और पूरे विश्व में महाशक्ति बनने की इच्छा जाहीर कर चुका है , वही देश की राजनीति न जाने देश को क्या देना चाहती है ?
क्या हर बात पे राजनीति करना अब हमारे देश के नेताओ और विपछी दलों को सोभा देता है ।
कोई कहता है की काम नही हो रहा कोई कहता है की किसानों का हक छीना जा रहा वो ये बताए की उन्होने क्या किया ?








photo internet



क्या अब कुर्सी के लिए हमारे राजनेता किसी भी हद तक गिरने को तैयार है । अरे इन लोगों ने जब संसार के सबसे पवित्र बंधन माँ और बेटे पे राजनीति कर डाली तो अब आप ये अनुमान लगा सकते है की राजनीति कहाँ और किस दिशा मे जा रही । हमारे प्रधान मंत्री के अमेरिका दौरे पर पूछे गए एक सवाल मे माँ को लेकर भाऊक हो जाना उसको भी कुछ नेता राजनीति से जोड़ कर देख रहे है ।क्या वे इतना गिर गए की माँ के नाम ओपर भी राजनीति कर डाली ।आखिर अगर कोई काम करता है तो उसका हाथ क्यो पकड़ लिया जाता आखिर किसी को सही ढंग से काम क्यू नही करने दिया जाता ।




कितने शर्म की बात है अरे जब बोलने को कुछ नहीं है तो शांत ही रहे कम से कम अपना स्तर और नीचा तो न करे ।अभी अहल ही में देश की राजधानी से कुछ ही दूर पे हुई दादरी मे अफवाहों को लेकर एक व्यक्ति की हत्या को एक हफ्ते हो गये है। और बाकी की राजनीति के बारे मे आपको पता ही होगा क्योकि मै  किसी विशेष दल या नेता के विषय मे कुछ खास नही कहना चाहता , लेकिन इस घटना पे विवाद अभी खतम नही हुआ है इस पूरे मामले की राजनीति अब उत्तर प्रदेश से बिहार चुनाव तक पहुच चुका है। और इस बात को लेकर इतनी दिशाहीन राजनीति हो रही है।ये पूरा देश देख रहा है ।किसी ने दादरी को बाबरी से जोड़ दिया तो किसी ने माँस पे बेतुके बयान देकर राजनीति को गंदा किया ।आखिर ये लोग किस जनता को क्या समझते है ?

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21वी सदी मे हमारे राजनेता क्या लोगों को गुमराह कर पाएंगे जो धर्म के नाम पे वोट पाने की फिराक मे लगे हुये है हमारे देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है उसको पता है की उसको वोट किसको देना है आखिर ये लोग किसको गुमराह कर रहे है भोलीभाली जनता को या खुद को ये तो बिहार चुनाव का नतीजा ही बताएगा ।फिलहाल हम सिर्फ इतना चाहते है की देश मे साफ सुथरी राजनीति हो ।बस राजनीति की सियासत बन्द होनी चाहिए कोई भी किसी को भी कुछ बोल देता है अपशब्दों का प्रयोग बन्द होना चाहिए और अगर नही होता है तो हमारे देश की जनता को अब तो जागना ही होगा आखिर कब तक ऐसे लोगो को चुन कर अपने देश की राजनीति का मज़ाक बनाएँगे ।


Tuesday, January 27, 2015

Basant Panchami


बसंत पंचमी का जिक्र करते ही हमारे मन मे बदलते मौसम का ख्याल आता है या यूं कह ले की सर्दि से निजाद मिलने का आभास हो जाता है (यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है ) क्यूकि बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है जिसको हम ऋतुराज के नाम से जानते है जी हाँ बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा होता है।



 इस दिन से प्रकृति के सोंदर्य मे निखार दिखने लगता है ।पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते है और उनके नये गुलाबी रंग के पत्ते मन को मुग्ध करते है ,बसंत पंचमी को हम अलग अलग तरह से मानते है ।इस दिन को बुद्धि ,ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करके मानते हैं। लेकिन इस बसंत पंचमी की बात करे तो सर्दियों के कारण कुछ फीका जरूर पड़ गया लेकिन इसका ये मतलब नही की बसंत पंचमी को लोगों ने हल्के मे लिया हो ।

इस दिन को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप में भी मनाते हैं । इसका अपना एक अलग ही महत्व है , ये दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इस दिन हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है। और बसंत ऋतु के आने की खुशी मे हम पीले वस्त्र धारण करते है जिसको शुभ माना जाता है ।


हमारे देश में कई स्थानों पर पतंग उड़ाकर ये उत्सव मनाया जाता है, हाँलांकि ये परंपरा भारत में कुछ ही हिस्सो मे है । और जैसा की हम सब जानते है की बसंत ऋतु घूमने फिरने और खाने पीने के लिए उपयुक्त माना जाता है यानि की पूरा माह आनंद के लिए उपयुक्त होता है तभी तो बसंत को ऋतुराज कहा जाता है । 

Wednesday, December 24, 2014

बाबा और समर्थक

हमारे देश के संविधान मे किसी भी धर्म और आस्था को मानने की स्वतंत्रता दी गयी है । लेकिन क्या ये सही है, कुछ लोग इसी आस्था का फायदा उठा कर लोगों को खुले आम लूटते है और आस्था के नाम पर अपने देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ खेलते है ।



मैं बात कर रहा हूँ उन नकाब पोशों के बारे मे जो आस्था के नाम पर एक धब्बा है , जी हाँ मै बात कर रहा उन बाबाओं की जो की  आस्था के नाम पे लोगों को लूट रहे हैं खुद को साधू (संत )बताने वाले रामपाल और उसके समर्थको ने जिस तरह से (हरियाणा के हिसार में) उत्पात मचाया था ,उसके पीछे अंध श्रद्धा और गठजोड़ की ताकत ही तो थी, यही कुछ आसाराम के समर्थको ने भी किया था ।लोग जब तक समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है आखिर कब लोगों को समझ आयेगा ?



बाबा रामपाल पर हत्या ,ह्त्या के प्रयास और कई मामले दर्ज हैं और अब उनपर और उनके समर्थकों पर राष्ट्र द्रोह का मामला दर्ज किया गया है । उनके समर्थको और पुलिस के बीच टकराव का ही नतीजा था की पाँच महिलाओं और एक बच्चे की जान चली गयी थी ।


ऐसे बाबा हरियाणा मे ही नही बल्कि कहीं भी हो सकते है ,कभी जूनियर इंजीनियर रहे इस बाबा ने मात्र एक दशक मे इतना कुछ पा लिया की खुद को भगवान ही समझ बैठा ।वैसे सोचने की बात ये है की कई दफा गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद ये पुलिस के हाथ नही आ रहा था क्यूंकी ऐसे बाबा को इनके समर्थको का संरक्षण प्राप्त होता है जिससे ये आसानी से बच निकलते है , और इनकी खुद की निजी सेनाए भी होती है जो की समर्थको पर दबाव बना कर बच निकलते हैं। फिलहाल तो बाबा अभी जेल मे हैं देखना ये है की इनको क्या सजा मिलती है ।


लोगों को खुद ही ऐसे पाखंडी बाबाओं से बचना होगा खुद सही गलत की पहचान करनी होगी क्यूंकी किसी ने सच ही कहा है ‘’एक मछ्ली पूरे तालाब को गंदा कर देती है’’ तो ऐसे लोगों को समाज से बाहर निकाल फेंकना होगा ।


(फोटो इंटरनेट )

Monday, November 3, 2014

ढंग की बात

इस देश मे कई ऐसे गंभीर मुद्दे है जिनपर कानून तो बहुत बनाए गए लेकिन सरकारें ज्यादा ध्यान नही देती कई ऐसी छोटी छोटी बातें है जैसे सफाई ही ले लीजिये हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने भारत को स्वछ भारत बनाने का अभियान जो चलाया है, जिसमे क्या नेता और क्या अभिनेता यहाँ तक की क्रिकेट के भगवान  ने इस अभियान का हिस्सा बन कर ये बता दिया है की अगर इरादे नेक हों तो मंजिल तक पहुँचने से कोई नही रोक सकता ।


अभी जल्द ही प्रधान मंत्री जी ने  अपनी बात सीधे जनता से करने का एक नया माध्यम ढूंढ निकाला है , जी हाँ मै  बात कर  रहा हूँ ‘’मन की बात ‘’ रेडियो के माध्यम से प्रधान मंत्री जी ने तीन अक्टूबर को पहली बार विभिन्न मुद्दों पे अपने मन की बात सीधे सीधे जनता से कह डाली थी ,यही हुआ इस रविवार रेडियो के लगभग सभी स्टेशनों (F.M,S.W,M.W) से ये प्रोग्राम प्रसारित किया गया । 







प्रधान मंत्री ने लगभग 20 मिनट तक अपनी बातें प्रकट किं जिसमें  कई ऐसे निम्न स्तर की समस्याए है जो आम जनता के लिए काफी हद तक हानिकारक साबित हो रही है । श्री मोदी ने शारीरिक अक्षमता , नशा मुक्ति , बाल स्व्छ्ता जैसी बातों पर ज़ोर दिया । आज कल लोगो के मन मे उठ रहे काले धन को लेकर जो भी सवाल थे उन्होने लगभग उसका भी समाधान कर दिया उन्होने काले धन को लेकर कहा की वो उसको लाने में काफी ढृड़ है और गरीबो का पैसा जो ब्लैक मनी के रूप मे दूसरे देशो मे जमा है उसको ला कर ही दम लेंगे । ये उनके विरोधियों के लिए भी एक मुहतोड़ जवाब था  जो की इस मामले मे बोलने का एक अवसर पा गए  थे परंतु ‘’मन की बात’’ के बाद उनको भी जवाब मिल ही गया  होगा । 


जहां कुछ नहीं था वहाँ एक आशा की किरन  तो नजर आने लगी है कहते है ना की डूबते को तिनके का सहारा ही बहुत होता है और जनता को अब इस कार्यक्रम के बाद मोदी जी से और आशाएँ होना जायज है ये तो वक्त ही बताएगा की क्या होता है पर बहुत दिनो के बाद लग रहा है जैसे की अब की हो किसी सरकार ने जनता के लिए ‘’ढंग की बात’’ 

Saturday, October 25, 2014

अगला हाथ हमारा

भारत में  हर साल सड़क दुर्घटना मे लाखों लोग मारे जाते हैं । और एक समाचार पत्रिका के अनुसार भारत मे एक साल मे दस लाख से भी ज्यादा मौते सड़क दुर्घटना मे होती हैं ,ये एक चिंता का विषय है इसको हमें गंभीर रूप से लेना होगा । 



पिछले कुछ सालों मे वाहनों की तादात में  इजाफा हुआ है जिसके कारण यह आकड़ा तेजी से बढ़ा है ।
इसका कारण है की शराब पी कर वाहन चलना ,यातायात नियमों का पालन ना करना , मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते समय करना और रफ्तार मे ओवरटेक करने की कोशिश करना । 




लेकिन क्या कोई और कारण नही है ? क्या इससे होने वाली मौतों को हम कम कर सकते है? जी हाँ बिल्कुल कर सकते है अक्सर ये देखा जाता है की सड़क पर कोई हादसा हो जाता है और कोई इंसान जिसका एक्सीडेंट हो गया वो सड़क पर तड़पता रहता है और उसकी मदद करने के लिए कोई भी नही आता लेकिन लोग वहा इकट्ठा होकर पुलिस या एम्ब्युलेन्स आने का इंतज़ार करते है ।लगभग 90% लोग सिर्फ तमाशा ही देखते है सिर्फ  10% लोग ऐसे होते है जो मदद को आगे आते है क्या आपने कभी सोचा है की आपके एक हौसले भरे कदम से किसी की जान भी बच सकती है । 







एक्सीडेंट के बाद प्राथमिक उपचार से भी जान बच सकती है, नहीं ट्रामा सेंटर लेकिन पास के किसी अस्पताल तक तो ले जा सकते हैं, या फिर पुलिस और एम्ब्युलेन्स बुलाने मे आप मदद कर  सकते है । तो आखिर हम क्यूँ किसी का इंतजार करते है ? खुद क्यूँ नहीं आगे आते आखिर कब तक हम एक दूसरे को ब्लेम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी को खुद समझना होगा और आगे आकर हेल्प करना होगा । तो आज ही आपको  ये तय कर लेना चाहिए की जो पहला मदद  का हाथ हो वो आपका हो । 
(फोटो इंटरनेट..)

Monday, October 20, 2014

आगाज हो चुका है



क्या एक बड़े बदलाव बिगुल बज गया है ? मै आज बात कर रहा हूँ, भारतीय राजनीति की जहाँ कितने सालों के बाद एक बदलाव देखने को मिला हैं, लोकसभा चुनाव मे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद अभी हाल ही मे हुये हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा के चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे उभर  कर सामने आई है, और इससे ये साफ झलकता है की लोकसभा चुनाव के पाँच महीने बाद भी मोदी का असर अभी भी लोगों पे बरकरार है। हालांकि ये बात तो सच है की महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ अपने दम पर सरकार बनाने का सपना तो साकार नही हो पाया, लेकिन इसको भी नकारा नही जा सकता की उद्धव ठाकरे के अहंकार को करारा जवाब मिला है । 


आज जनता ये जान चुकी है की किसको चुनना है , हालांकि एनसीपी ने भाजपा को बाहर से समर्थन देने का एलान स्पष्ट कर दिया है की काग्रेस से अलग यू ही नही हुये थे, नरेंद्र मोदी के सघन प्रचार के बाद भी आखिर अस्सी से अधिक सीटे ले आई है । लेकिन उधर हरियाणा मे जुरुर भाजपा की ये के शानदार जीत है , जिस राज्य मे भाजपा ने कभी बिना सहयोगी दल के बगैर चुनाव लड़ा ही न हो और लड़ा भी तो भी इतनी उत्साह जनक सफलता नही मिल रही हो, वहा अकेले दम पर सभी सीटो पर चुनाव लड़ कर पर्याप्त मात्रा(47 सीटे ) मे सीटे जीतना कोई आम बात नही है ये भी एक चमत्कार ही है ।


इसमे कोई दो राय नही है की हरियाणा में काग्रेस की पराजय का कारण उसकी खराब छवि और सत्ता विरोधी मोदी लहर जिम्मेदार है मोदी लहर का एक प्रमाड़ तो यही है की मुख्यमंत्री का चेहरा सामने न रखकर भी इतनी शानदार जीत हासिल की है । इनोले प्रमुख का जमानत पर बाहर आकर चुनावी रैली करना किसी काम नही आया,हरियाणा का ये चुनाव नतीजा सभी स्थानीय पार्टियो के लिए एक चेतावनी है ,जो अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए जाती वाद और छेत्रवाद का सहारा लेती रहती है हरियाणा के मतदाताओ ने इस तरह की राजनीति को नकार कर बदलाव की तरफ वोट दिया है । 


लिहाजा ये भाजपा और उनकी पार्टी वालों के लिए भी एक अग्नि परीक्षा से कम नही उनको भी जनता के विश्वास पर खरा उतरना होगा और  भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन पर ज्यादा ध्यान देना होगा । 

(फोटो इन्टरनेट)