हमारे देश के संविधान मे किसी भी धर्म और आस्था को मानने की स्वतंत्रता दी गयी है । लेकिन क्या ये सही है, कुछ लोग इसी आस्था का फायदा उठा कर लोगों को खुले आम लूटते है और आस्था के नाम पर अपने देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ खेलते है ।
मैं बात कर रहा हूँ उन नकाब पोशों के बारे
मे जो आस्था के नाम पर एक धब्बा है , जी हाँ मै बात कर रहा उन बाबाओं की जो की आस्था के नाम पे लोगों को लूट रहे हैं खुद को साधू
(संत )बताने वाले रामपाल और उसके समर्थको ने जिस तरह से (हरियाणा के हिसार में)
उत्पात मचाया था ,उसके पीछे अंध श्रद्धा और गठजोड़ की ताकत ही तो थी, यही कुछ आसाराम
के समर्थको ने भी किया था ।लोग जब तक समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है आखिर
कब लोगों को समझ आयेगा ?
बाबा रामपाल पर हत्या ,ह्त्या के प्रयास
और कई मामले दर्ज हैं और अब उनपर और उनके समर्थकों पर राष्ट्र द्रोह का मामला दर्ज
किया गया है । उनके समर्थको और पुलिस के बीच टकराव का ही नतीजा था की पाँच महिलाओं
और एक बच्चे की जान चली गयी थी ।
ऐसे बाबा हरियाणा मे ही नही बल्कि कहीं भी
हो सकते है ,कभी जूनियर इंजीनियर रहे इस बाबा ने मात्र एक दशक मे इतना कुछ पा
लिया की खुद को भगवान ही समझ बैठा ।वैसे सोचने की बात ये है की कई दफा गैर जमानती वारंट
जारी होने के बावजूद ये पुलिस के हाथ नही आ रहा था क्यूंकी ऐसे बाबा को इनके समर्थको
का संरक्षण प्राप्त होता है जिससे ये आसानी से बच निकलते है , और इनकी खुद की निजी सेनाए भी होती है जो की समर्थको पर दबाव बना कर बच निकलते
हैं। फिलहाल तो बाबा अभी जेल मे हैं देखना ये है की इनको क्या सजा मिलती है ।
लोगों को खुद ही ऐसे पाखंडी बाबाओं से बचना
होगा खुद सही गलत की पहचान करनी होगी क्यूंकी किसी ने सच ही कहा है ‘’एक मछ्ली
पूरे तालाब को गंदा कर देती है’’ तो ऐसे लोगों को समाज से बाहर
निकाल फेंकना होगा ।
(फोटो इंटरनेट )
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