अफवाहों का दौर: जब स्थानीय बातें आग से भी तेज फैलती हैं -
दोस्तों, भारत में अफवाहों का इतिहास नया नहीं है। यह कहना गलत होगा कि डर और भ्रम केवल सोशल मीडिया के दौर की देन नहीं हैं। सच यह है कि पहले भी स्थानीय स्तर पर उठी छोटी-छोटी अफवाहें धीरे-धीरे पूरे देश और प्रदेश के कई कोनों तक फैल जाती थीं और लोगों के व्यवहार को प्रभावित करती थीं। बचपन से लेकर आजतक कुछ महत्वपूर्ण अफवाहों को याद करके मैं यह लेख लिख रहा हूँ शायद इससे आप सभी की स्मृति भी ताज़ा हो जाएँ।
आज जब रसोई गैस (LPG) सिलेंडर को लेकर हलचल देखने को मिल रही है—जहाँ कई लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर भरवाने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ मौके का फायदा उठाकर जमाखोरी और मुफ्तखोरी का अवसर तलाश रहे —तो यह हमें अतीत की कई घटनाओं की याद दिलाता है जिसमें अफवाहों ने एक आम ज़िंदगी के जीवन में अपनी छाप छोड़कर कुछ खट्टी मीठी यादों के रूप मे हम उन्हे याद कर सकते है ।
नमक की अफवाह
साल 2016 के आसपास की बात है प्रदेश के कई हिस्सों खासकर तराई इलाकों में जैसे बहराइच, बाराबंकी, सीतापुर, और भी बहुत सारे जिलों में अचानक यह खबर फैल गई कि नमक की कमी होने वाली है। यह अफवाह इतनी तेजी से फैली कि लोग रातों-रात दुकानों पर लोग लाइन लगाकर टूट पड़े। और जो नमक एक साल में बिकता होगा, वह तुरंत एक दो रातों में ही बिक गया। जहाँ एक तरफ जरूरत से ज्यादा खरीदारी हुई, वहीं दूसरी तरफ बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बन गया—जबकि हकीकत में ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी।
“लोग पत्थर बन रहे हैं”
सन 2014 की बात रही होगी और कुछ लोगों का कहना था यह दुनिया का अंत है और फिर उत्तर भारत के खासकर लखनऊ के कुछ क्षेत्रों में एक अजीब और डरावनी अफवाह फैल गई कि रात में बाहर निकलने पर लोग पत्थर बन जाएंगे और रात भर सोना भी नहीं है । ऐसे मे लोग रात को एक दूसरे को फोन करके जगा जगा कर पूछ रहे थे एक दूसरे का हाल चाल जो पूरी तरह निराधार थी, लेकिन डर इतना गहरा था कि लोगों ने रात में बाहर निकलना बंद कर दिया। कई परिवार पूरी रात जागते रहे। यह बात अब कितनी हास्यास्पद है ।
‘मुंहनोचवा’ का डर
साल 2002 के आसपास उत्तर प्रदेश और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मुँह नोचवा’ नाम की एक रहस्यमयी अफवाह फैली। लोगों का मानना था कि कोई अज्ञात शक्ति रात में हमला कर चेहरा नोच लेती है। गर्मियों के दिनों में जब लोग छतों पर सोते थे, यह डर और भी ज्यादा फैल गया। यह एक ऐसा उदाहरण था जहाँ स्थानीय घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सामूहिक भय पैदा कर दिया। और जब कोई अफवाह फैलती है तो तुरंत उससे संबंधित बाते भी आने लगती है की आज यहाँ मुह नोचवा पकड़ा गया वहाँ पकड़ा गया । सब निराधार था ।
‘चोटी कटवा’ की घटना (2017)
‘बच्चा चोर’ की अफवाह
कोविड-19 और ऑक्सीजन सिलेंडर
वर्तमान संदर्भ: LPG गैस सिलेंडर को लेकर चिंता
अफवाहें कैसे फैलती हैं?
स्थानीय स्तर की छोटी घटना या चर्चा
लोगों के बीच तेजी से फैलती बातचीत
डर और अनिश्चितता
आधिकारिक जानकारी की कमी
धीरे-धीरे यही बातें गांव से शहर और एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुँच जाती हैं। आजकल लोगों का सोशल मीडिया के जरिए ।
हमें क्या करना चाहिए?
केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें
जरूरत के अनुसार ही सामान खरीदें
बिना पुष्टि के खबर आगे न बढ़ाएं
धैर्य और समझदारी बनाए रखें
निष्कर्ष
भारत में अफवाहों का यह सिलसिला नया नहीं है। नमक से लेकर मुंहनोचवा, चोटी कटवा और अब गैस सिलेंडर तक, हमने कई बार देखा है कि कैसे स्थानीय स्तर की अफवाहें पूरे देश में फैलकर डर और असंतुलन पैदा कर देती हैं।
धैर्य और सही जानकारी ही किसी भी अफवाह का सबसे मजबूत जवाब है।
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