आज मदर डे है और ये कोई बताने की बात नही है की माँ बच्चों के दिल में एक खास जगह रखती है। माता,माँ,मॉम,मम्मी नाम अनेक लेकिन रिश्ता और स्नेह एक ही है। मदर डे हर साल मई में दूसरे सफ्ताह के रविवार को मनाया जाता है। जिसको लोग अपनी अपनी तरह से मानते है। एक माँ 100 शिक्षको से ज्यादा ज्ञान अपने बच्चे को देती है और कहा जाता है की माँ ही बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है।
(फ़ोटो इंटरनेट)
माँ के किरदार को हमारे सिनेमा ने भी खूब सराहनीय ढंग से पेश किया है । समय समय पर ऐसी फिल्में आती है जिसमे माँ का किरदार काफी दमदार और भावनात्मक होता है । मदर इन्डिया से लेकर निल बटे सन्नाटा तक फिल्मो में माँ की एक अहम् भूमिका रही है 50-60 के दशक में माँ का किरदार फिल्मो में काफी महत्वपूर्ण रहता था और दिवार फ़िल्म का डाइलॉग "मेरे पास माँ है" आज भी लोगो के जहन में ज़िंदा है ।
माँ तो माँ ही होती है लेकिन समय के साथ साथ आजकल माँ ने आधुनिक माँ का रूप ले लिया है जो की अपने बच्चों की माँ के साथ एक अच्छी मित्र भी है । क्युकी जिस तरह से डिजिटलाइजेसन बढ़ा है माँ ने अपने बच्चों का साथ दिया है।
क्योंकि जब कोई संकट आती है तो पहले माँ ही याद आती है और कहीं न कहीं इंसान की सफलता में उसकी माँ का अहम् रोल होता है।माँ ही हमे बचपन में अच्छे बुरे की पहचान बताती है और एक सही मार्गदर्शक का रूप निभाती है ।
आप कितना भी अच्छा खाना खाते हो लेकिन माँ के हाथ के खाने की बात ही कुछ और होती है। यहाँ ये कहना गलत नही होगा की भगवान ने अपनी जगह माँ को हमारे बिच भेजा है। जीवन में सफलता पानी है तो अपनी माँ के द्वारा दिखाए मार्ग पर चले सफलता अवश्य मिलेगी। माँ के विषय में जितना लिखो उतना ही कम हैं।


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