आज दहेज़ प्रथा हमारे समाज का एक ऐसा दीमक बन गया है जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। अगर घर में लड़की जन्म लेती है तो कुछ घरो में तो लोग उसकी परवरिश से ज्यादा चिंता उसकी शादी के दहेज़ के लिए करने लगते है । कुछ लोग तो सोचते है की बस कुछ ले दे के लड़की की शादी कर दो बस उनकी जिम्मेदारी ख़तम । और यही कारण है की आज दहेज़ हत्या दिन ब दिन बढ़ रही है । सरकार को इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए क्योंकि महिलाओ पर हो रहे अत्याचार पर अंकुश लगाया जाय।
एक आंकड़े के अनुसार दहेज़ हत्याए पहले से कुछ ज्यादा ही बढ़ी है इसके अनुसार 2007 से 2011 के बिच काफी हद तक नए मामले सामने आये है। 2012 में 2833 दहेज हत्या के मामले सामने आये । जो की 2011 में 2618 थी,2013 में ये बढ़कर 10709 हो गयी।अगर औसतन बात करे तो हर एक घण्टे में एक महिला की दहेज़ को लेकर हत्या होती है । जो की बहुत ही शर्मिंदगी की बात है। समाज में काफी कुछ बदल गया लेकिन ये दहेज़ प्रथा न बदल पाये ।
दहेज़ लेना या देना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ कार्यवाही भी होती है और अगर ऐसी कोई घटना हो तो उसकी शिकायत अवश्य कराये क्योंकि कभी कभी समाज के डर से बहुत सी महिलाये अपने साथ होने वाले दहेज़ उत्पीड़न को अपने परिवार या जानने वाले को नही बता पाती है और इसका फायदा वो लोग उठाते है जो दहेज़ के भूखे होते है वो महिलाओ को मानसिक और शारीरिक रूप से कष्ट देते है जो की कानूनन अपराध है । महिलाओ के लिए सरकार द्वारा कई कारगर कदम उठाये जा रहे है । उसके बाद भी अगर ऐसी घटनाये होती है कितने शर्म की बात है लोग बदलाव की बात करते है लेकिन खुद को नही बदलते क्योंकि जब आप बदलेंगे तभी समाज बदलेगा।
keep change
(फ़ोटो इंटरनेट)
एक आंकड़े के अनुसार दहेज़ हत्याए पहले से कुछ ज्यादा ही बढ़ी है इसके अनुसार 2007 से 2011 के बिच काफी हद तक नए मामले सामने आये है। 2012 में 2833 दहेज हत्या के मामले सामने आये । जो की 2011 में 2618 थी,2013 में ये बढ़कर 10709 हो गयी।अगर औसतन बात करे तो हर एक घण्टे में एक महिला की दहेज़ को लेकर हत्या होती है । जो की बहुत ही शर्मिंदगी की बात है। समाज में काफी कुछ बदल गया लेकिन ये दहेज़ प्रथा न बदल पाये ।
दहेज़ लेना या देना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ कार्यवाही भी होती है और अगर ऐसी कोई घटना हो तो उसकी शिकायत अवश्य कराये क्योंकि कभी कभी समाज के डर से बहुत सी महिलाये अपने साथ होने वाले दहेज़ उत्पीड़न को अपने परिवार या जानने वाले को नही बता पाती है और इसका फायदा वो लोग उठाते है जो दहेज़ के भूखे होते है वो महिलाओ को मानसिक और शारीरिक रूप से कष्ट देते है जो की कानूनन अपराध है । महिलाओ के लिए सरकार द्वारा कई कारगर कदम उठाये जा रहे है । उसके बाद भी अगर ऐसी घटनाये होती है कितने शर्म की बात है लोग बदलाव की बात करते है लेकिन खुद को नही बदलते क्योंकि जब आप बदलेंगे तभी समाज बदलेगा।
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