Thursday, October 20, 2016

इस दीपावली


जी दीपावली का नाम आते ही जेहन में दीप और पटाखों का ख्याल मन में आने लगता है। और आये भी क्यों न आखिर दिवाली है ही दीपों का त्यौहार इसी लिए तो मनाया जाता है अब आप लोगों को ये बताने की जरुरत मैं नहीं समझता की दिवाली क्यों मनाई जाती है क्योंकि हमको बचपन से ही इसके बारे में बताया जाता रहा है वैसे मैं संक्षेप में बता ही देता हूँ की रावण का वध करने के बाद और 14 वर्ष के वनवास के बाद जब श्री राम अयोध्या पहुँचे तो वहा की जनता अपने राजा के स्वागत में घी के दिए जलाये और उनका स्वागत किया ।


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पहले की दिवाली और आज की दिवाली में कितना बदलाव नज़र आ गया है ये अगर आप खुद ही एक बार दिल से सोचे तो पता लग जायेगा । दिवाली पे लोग अपने घर दुकान और आसपास साफ-सफाई और रंगाई पुताई करवाते है । क्या आपको पता है कि दिवाली भारत ही नहीं अपितु दूसरे देशों में भी मनाया जाता है दीवाली नेपाल, श्रीलंका, म्यामांर, मॉरीशस,गुयाना, मलेशिया, सिंगापुर,फिजी, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया की बाहरी सीमा पर क्रिसमस डीप और भी देशों में  दिवाली पर एक सरकारी अवकाश है।


इस दिवाली मैं कुछ खास आग्रह करने वाला हूँ जी हाँ मैं इन दिवाली उन लोगों से बात करना चाहता हूँ जो सर्जिकल स्ट्राइक और देश भक्ति फेसबुक और ट्विटर के माध्यम से दिखाते है क्योंकि अब वो समय आ गया है जब देश भक्ति में कुछ करके दिखाया जाय । दोस्तों सभी जानते है कि पाकिस्तान को चीन की सह प्राप्त है यानि चीन पाकिस्तान को सपोर्ट करता है और दिवाली आते ही भारतीय बाज़ारों में रौनक दिखाई देने लगती है लेकिन आपको नहीं लगता कि ये रौनक चाइनीज सामानों से भरी होती है । क्यूँ न इस दिवाली हम अपने सेना को जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि दे और हर भारत वासी को इस बार चाइना का कोई भी सामान नहीं खरीदने की सलाह दें , क्योंकि चाइना भारत से व्यापार करके आर्थिक रूप से काफी मुनाफा होता है या तो ये कह ले की हम अपने दुश्मनों का सामान क्यों लें । जी हां इस दिवाली चाइनीज झालर लाइट और मोमबत्तियों का बहिष्कार होना चाहिए जिससे चीन को अपनी औकात पता चल जाय ।


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इस दिवाली को मिट्टी के दिये ख़रीदे जिससे किसी गरीब की मदद हो जो इस दिए को बना के बेचते है क्या पता उस गरीब का कुछ फायदा ही हो जाय और तेल का दिया जलाये, जिससे वातावरण भी शुद्ध होगा और चाइनीज सामानों को भी बढ़ावा नही मिलेगा । दोस्तों पिछली दिवाली को प्रधान मंत्री ने भी मिट्टी के दिए जलाने का आग्रह किया था जिसपे बहुत से लोगों ने अमल भी किया था । लेकिन इस बार कोई भी बहाना न करिये और स्वदेशी चीजों का इस्तेमाल करिये । अपने देश के प्रति अपनी भागीदारी को समझीये । अगर आपने अपनी दिवाली की खरीदारी कर ली है तो कोई नही लेकिन आगे से चाइनीज समानो का बहिष्कार करिये ।
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यहां तक की बाज़ारों में चाइनीज दिये और लक्ष्मी गणेश भगवान की मूर्ति भी चाइनीज आ रहीं है अपने देश की कला को पहचानिये अगर अब नही जागेंगे तो कब जागेंगे ? अनजाने में ही सही आप दुश्मनों की मदद करते है । क्योंकि जो गोली हमारे देश के जवानों को लगती है इन्ही पैसों से आती है चीन हमारे ही दम पर हमें ही आँख दिखाता है । हमारे भारत के बाज़ारों में चीन ने काफी अच्छी पकड़ बना ली है। इस पकड़ को कमज़ोर करना है इस दिवाली निकलेगा चाइनीज सामानों का दिवाला । इस बार कुछ कर दिखाना है । पुतले और कैंडल मार्च तो बहुत निकाल लिए अब कुछ कर दिखाने का समय है इसको नष्ट न करे और अपने आस पड़ोस बच्चों बड़ो जो भी ये लेख पढ़े सभी से विनम्र आग्रह है कि अपने देश को आगे बढ़ाने में मदद करें ।
और इस दिवाली स्वदेशी दिवाली मनाइये देखिये उन लाइटों से ज्यादा आनंद दिये में आयेगा ।
दिवाली ही नही बल्कि हमेशा के लिए चाइनीज चीजों का बहिष्कार होना चाहिए इसकी शुरुआत इस दिवाली से करना है दोस्तों । दूसरों को भी इसके बारे में जानकारी देते रहे और भारतीय होने का फ़र्ज़ निभाएं।
शुभ दिवाली और सुरक्षित दिवाली सभी को दिवाली की हार्दिक शुभ कामनाएं ।

Friday, October 7, 2016

सर्जिकल स्ट्राइक

भारत माता की जय जी हाँ हमारी सेना ने जो काम किया है उसके लिये तो सिर्फ यही कहना है सभी भारत वासी का मैं बात कर रहा भारत के द्वारा किये गए सर्जिकल स्ट्राइक का जिसमें सेना के जवानों के जज्बे को सलाम । सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पहली बार भारत में सभी राजनितिक पार्टिया सेना के साथ दिखी और पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब के लिए सेना को बधाइयां दी । लेकिन जब कुछ राजनीतिक पार्टियों से ये नहीं देखा गया की सरकार की वाहवाही हो रही है या ये कह ले की वर्तमान पार्टी को कही कुछ फायदा तो नही हो रहा ।
लेकिन अचानक से न जाने कहा चली गयी उन विपक्षी पार्टियों की देशभक्ति की वो सेना के जवानों पर ही संदेह कर बैठे की सर्जिकल स्ट्राइक हुआ भी है या नहीं अरे विपक्ष में रहने का या मतलब जरूर है कि वो वर्तमान सरकार का विरोध करें लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि वो सेना और शहीदों पर भी राजनीती शुरू कर दें ।
अरे जाकर कोई पूछे उन शहीदों के माँ बाप से जिन्होंने अपने बेटे और उस पत्नी ने जिसने अपना पति खोया हो और उस बच्चे पे क्या बीतेगी जिसने अपने पिता का साया खोया हो।
उन भारत माँ के सपूतों को याद करने के बजाय ये बेवजह की बयान बाजी के इस दौर में हर पार्टी शामिल है । कोई भी इससे अछूता नही रहा है ।
शर्म आनी चाहिए उन लोगों को एक तरफ जवान अपने जान की बाजी लगाकर देश की रक्षा करता है और दूसरी तरफ वो लोग जो अपने घर में सुरक्षित है बयान पे बयान दिए जा रहे ।
कम से कम सेना को तो अपना काम सही ढंग से करने दिया जाय उनका हौसला अफजाई न कर सके तो उनके उस विश्वास और प्यार को टूटने भी न दिया जाय सोचिये उस जवान पे क्या गुजरेगी जो सरहद पे अपने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति लगा देते हैं ।
(फोटो इन्टरनेट)

मैं किसी एक पार्टी या व्यक्ति विशेष के बारे में कुछ नही कहना चाहूंगा क्योंकि देश की जनता देख रही है कि कौन क्या कह रहा है , किसी को कुछ बताने की जरुरत नही है ।
हमारे देश की सीमा सुरक्षित है तभी हम चैन की नींद सो पा रहे है और उनके ही कार्य प्रणाली पे सवाल उठाना खुद चुल्लू भर पानी में डूब मरने जैसा है ।
राजनीती का मतलब ही भूल गए है हमारे नेता की किस भाषा का प्रयोग करना चाहिए । कोई भी कुछ भी बोल देता है राजनेता तो छोड़िए कुछ अभिनेता भी इस मौके का फायदा उठाने में बाज़ नही आ रहे चाहे कभी सरहद पर जाकर ये देखने की कोशिश न की हो की कैसे सीमाओं को सुरक्षित रखते है ये जवान । लेकिन सबकी देश भक्ति सोशल मिडिया फेसबुक ट्विटर या किसी वीडियो से दिख रही है अरे मदद करनी ही है तो उन शहीदों को जाकर सच्चे दिल से श्रद्धांजलि दो ।
(फोटो इन्टरनेट)
ये पहला ऐसा मौका होगा की देश के ही नेता अपने देश की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं दिख रहे । जनता को अब सोच समझकर ही अपना वोट देना होगा ।
क्योंकि ये लोग खुद तो शर्मसार होते ही बल्कि देश का नाम भी खराब करते है दूसरे देशों में ऐसा लगता है ये अपने देश नही पड़ोसी देश की तरफ से चुनाव की तैयारियां कर रहे । मैं क्या कहना चाहता हूँ कुछ बुद्धिजीवी लोगों के समझ आ गयी होगी क्योंकि मैं किसी का नाम लेकर उन्ही लोगों की लिस्ट में नहीं शामिल होना चाहता । क्योंकि पाकिस्तान जैसे देश का साथ जब पूरी दुनिया नहीं दे रही तब ये राजनेता ऐसे बयान देकर एक चिंतनीय विषय स्थापित करते है ।
आज एयर फोर्स डे है इस अवसर पर देश के वीरों को सत् सत् नमन करता हूँ। ऐसे ही वो दुश्मनों को मुह तोड़ जवाब देते रहे इसकी कामना करता हूँ।
जय हिंद जय भारत

Monday, August 29, 2016

राष्ट्रिय खेल दिवस और मेजर ध्यान चंद


आज राष्ट्रिय खेल दिवस है और क्या आपको पता है की भारत में राष्ट्रिय खेल दिवस 29 अगस्त को क्यों मनाया जाता है।क्योंकि 29 अगस्त के दिन ही हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद का जन्मदिन है । जी हाँ भारत के हॉकी के जादूगर का जन्म 29 अगस्त 1905 में इलाहबाद में हुआ था।




(फोटो इन्टरनेट) 

मेजर ध्यान चन्द को क्रिकेट में सर डॉन ब्रैडमैन और फुटबॉल में पेले के समतुल्य माना जाता है जैसे की हम सचिन को क्रिकेट का भगवान कहते है वैसे ही मेजर ध्यान चंद को हम हॉकी का जादूगर कहते है।

क्योंकि ध्यानचंद जब खेलते थे तो बॉल उनकी हॉकी से यू चिपक जाती थी जैसे चुम्बक में लोहा चिपक जाता हो। और यहां तक की उनकी हॉकी में चुम्बक होने की आशंका होने को लेकर उनकी हॉकी तक तोड़ के देखी गयी। और जब वो खलते थे तो दर्शक तो उनके मुरीद हो ही जाते थे बल्कि प्रतिद्वंदी टीम के खिलाड़ी भी उनके खेल के कायल हो जाते थे। उनके इस जादूगरी के बारे में न जाने कितने किस्से है जिनको बताने के लिए शब्द भी कम पड़ जायेंगे। यहां तक की एक बार उनके खेल की कलाकारी से मोहित होकर  जर्मनी के जिद्दी तानाशाह हिटलर ने उनको जर्मनी की तरफ से खेलने  की पेशकश की थी जिसको इस भारत के सपूत ने ठुकरा दिया था और भारत की तरफ से ही खेलने का फैसला किया था।





(फोटो इन्टरनेट)


समय समय पर मेजर ध्यान चन्द का नाम सुर्ख़ियो में आता है वो भी इस बात को लेकर की उनको भारत रत्न दिया जायेगा लेकिन इतने वर्ष गुजर गए लेकिन अभी तक उनको भारत रत्न नही मिल पाया । आखिर क्यों है उनमे ये बात की भारत रत्न की पेशकश की जाती रही है उनके नाम पर तो मैं ये बता दूं की एक मेजर ध्यान चन्द ही है जो भारत को तीन बार ओलंपिक में हॉकी को स्वर्ण पदक दिलाया था । जी हाँ इसी खिलाड़ी की अगुआई में भारत ने 1928 में एम्सटरडम ओलंपिक फिर 1932 में लॉस एंजलिस और तीसरी बार बर्लिन ओलंपिक 1936 इन्हीं की कप्तानी में भारत को स्वर्ण पदक मिला । और ओलंपिक में 101 गोल और अंतर्राष्ट्रीय खेलों में 300 गोल दागे जिसे आज तक कोई तोड़ नही पाया है एम्सटरडम ओलंपिक में हॉकी मैच में 28 गोल किये गए जिसमे मेजर ध्यान चन्द के अकेले 11 गोल थे। मेजर ध्यान चंद सिंह को 1965 में भारत के तीसरे सबसे बड़े सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया । मेजर ध्यान चंद कैंसर जैसी बीमारी से ग्रसित होकर 1979 में दुनिया को अलविदा कह दिया।



हमारे देश के वर्तमान प्रधान मंत्री ने अपने आकाशवाणी पे प्रसारित होने वाले कर्यक्रम मन की बात में इस बात का जिक्र भी किया था। भारत को तीन बार स्वर्ण दिलाने के बाद भी मेजर ध्यान चंद को भारत रत्न अभी तक नही मिल पाया है लेकिन एक बार फिर से उनको भारत रत्न देने की मांग तेज़ हो गयी है पुरे देश में ये मांग हो रही है की ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाना चाहिए । यहां तक की उनके नाम पे एक स्टेडियम भी है
पिछली बार इनकी जगह सचिन तेंदुलकर को मिल गया था । देखना है अब क्या होता है देश को लगातार तीन बार स्वर्ण दिलाने के बाद भी वो इससे वंचित है ।
आज खेल दिवस पर मेजर ध्यान चन्द को सत् सत् नमन। 

Wednesday, May 11, 2016

दहेज़ एक समस्या

आज दहेज़ प्रथा हमारे समाज का एक ऐसा दीमक बन गया है जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। अगर घर में लड़की जन्म लेती है तो कुछ घरो में तो लोग उसकी परवरिश से ज्यादा चिंता उसकी शादी के दहेज़ के लिए करने लगते है । कुछ लोग तो सोचते है की बस कुछ ले दे के लड़की की शादी कर दो बस उनकी जिम्मेदारी ख़तम । और यही कारण है की आज दहेज़ हत्या दिन ब दिन बढ़ रही है । सरकार को इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए क्योंकि महिलाओ पर हो रहे अत्याचार पर अंकुश लगाया जाय।


(फ़ोटो इंटरनेट)

एक आंकड़े के अनुसार दहेज़ हत्याए पहले से कुछ ज्यादा ही बढ़ी है इसके अनुसार 2007 से  2011 के बिच काफी हद तक नए मामले सामने आये है। 2012 में 2833 दहेज हत्या के मामले सामने आये । जो की 2011 में 2618 थी,2013 में ये बढ़कर 10709 हो गयी।अगर औसतन बात करे तो हर एक घण्टे में एक महिला की दहेज़ को लेकर हत्या होती है । जो की बहुत ही शर्मिंदगी की बात है। समाज में काफी कुछ बदल गया लेकिन ये दहेज़ प्रथा न बदल पाये ।


दहेज़ लेना या देना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ कार्यवाही भी होती है और अगर ऐसी कोई घटना हो तो उसकी शिकायत अवश्य कराये क्योंकि कभी कभी समाज के डर से बहुत सी महिलाये अपने साथ होने वाले दहेज़ उत्पीड़न को अपने परिवार या जानने वाले को नही बता पाती है और इसका फायदा  वो लोग उठाते है जो दहेज़ के भूखे होते है वो महिलाओ को मानसिक और शारीरिक रूप से कष्ट देते है जो की कानूनन अपराध है । महिलाओ के लिए सरकार द्वारा कई कारगर कदम उठाये जा रहे है । उसके बाद भी अगर ऐसी घटनाये होती है कितने शर्म की बात है लोग बदलाव की बात करते है लेकिन खुद को नही बदलते क्योंकि जब आप बदलेंगे तभी समाज बदलेगा।
keep change

Sunday, May 8, 2016

MOTHER DAY

आज मदर डे है और ये कोई बताने की बात नही है की माँ बच्चों के दिल में एक खास जगह रखती है। माता,माँ,मॉम,मम्मी नाम अनेक लेकिन रिश्ता और स्नेह एक ही है। मदर डे हर साल मई में दूसरे सफ्ताह के रविवार को मनाया जाता है। जिसको लोग अपनी अपनी तरह से मानते है। एक माँ 100 शिक्षको से ज्यादा ज्ञान अपने बच्चे को देती है और कहा जाता है की माँ ही बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है। 


(फ़ोटो इंटरनेट)

माँ के किरदार को हमारे सिनेमा ने भी खूब सराहनीय ढंग से पेश किया है । समय समय पर ऐसी फिल्में आती है जिसमे माँ का किरदार काफी दमदार और भावनात्मक होता है । मदर इन्डिया से लेकर निल बटे सन्नाटा तक फिल्मो में माँ की एक अहम् भूमिका रही है 50-60 के दशक में माँ का किरदार फिल्मो में काफी महत्वपूर्ण रहता था और दिवार फ़िल्म का डाइलॉग "मेरे पास माँ है" आज भी लोगो के जहन में ज़िंदा है ।
















(फ़ोटो इंटरनेट)
माँ तो माँ ही होती है लेकिन समय के साथ साथ आजकल माँ ने आधुनिक माँ का रूप ले लिया है जो की अपने बच्चों की माँ के साथ एक अच्छी मित्र भी है । क्युकी जिस तरह से डिजिटलाइजेसन बढ़ा है माँ ने अपने बच्चों का साथ दिया है।
क्योंकि जब कोई संकट आती है तो पहले माँ ही याद आती है और कहीं न कहीं इंसान की सफलता में उसकी माँ का अहम् रोल होता है।माँ ही हमे बचपन में अच्छे बुरे की पहचान बताती है और एक सही मार्गदर्शक का रूप निभाती है ।
आप कितना भी अच्छा खाना खाते हो लेकिन माँ के हाथ के खाने की बात ही कुछ और होती है। यहाँ ये कहना गलत नही होगा की भगवान ने अपनी जगह माँ को हमारे बिच भेजा है। जीवन में सफलता पानी है तो अपनी माँ के द्वारा दिखाए मार्ग पर चले सफलता अवश्य मिलेगी। माँ के विषय में जितना लिखो उतना ही कम हैं। 

Friday, May 6, 2016

swach bharat abhiyan

हमे अपने वातावरण को साफ सुथरा रखना चाहिए ये तो सब जानते है लेकिन इस बात पर अमल कौन करता है । और अगर सही कहे तो हमारे समाज में गंदगी की भी एक जगह बन गयी है या ये कह सकते है की गन्दगी की भी समाज में जगह है ।हमे कुछ देखने को मिले न मिले कहीं न कहीं कचरे का ढेर लगा जरूर दिखेगा, बस उनकी शक्ल या फिर मात्रा अलग अलग हो सकती है । और इस परेशानी से निपटने के लिए ही हमारे देश के प्रधानमंत्री ने देश में स्वछ भारत अभियान की शुरुआत की। शुरूआती दौड़ में बड़े नामी गिरामी लोगो ने बढ़ चढ़ क़र सफाई अभियान में हिस्सा लिया । जो की बहुत ही गर्व की बात है । लेकिन दुख की बात यह है की कुछ लोगो ने शुरूआती दिनों में एक या दो दिन इस अभियान में सफाई करते हुए अपनी फ़ोटो मिडिया में और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे शेयर की । और कुछ ने तो साफ जगह को ही साफ डाला और कुछ ने तो बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और यह सही भी है और कहीं न कहीं बदलता और स्वछ भारत नज़र भी आ रहा था लेकिन अब काफी दिन बीत जाने के बाद कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी को भुल गए है ये स्वछ भारत अभियान किसी एक का नही है ये पुरे देश के लिए और हर एक नागरिक के उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की हमारे देश के लिए ।
लेकिन कुछ लोग कहते है की ये मेरा काम थोड़े ही है लेकिन क्या वो अपने घर को साफ नही करते ।
स्वछ भारत के अभियान को सफल बनाये काफी दिन से मुझे लग रहा हैं कि  कही फिर से लोग भूल तो नही गए इस अभियान को अपनी जिम्मेदारियों को समझे और स्वछ बनाने में अपने देश का साथ दे।
कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारा शहर अचानक  बहुत साफ दिखने लगता है तो हम आपस में पूछते है की क्या कोई आने वाला है क्या? जैसे कोई मंत्री या बड़ा नेता । क्योंकि जब कोई शहर में आने वाला होता है तो सड़क से लेकर नुक्कड़ तक साफ़ करवा दिए जाते है तो आने वाले को पता ही नही चल पता की शहर में गन्दगी है या नही । लेकिन क्या ये बिना किसी के आये रोज़ नही हो सकता ? हो सकता है लेकिन कोई अपनी जिम्मेदारियो को समझता नही ।
जो कहीँ कचरा फेके उसे एक बार कूड़ेदान में डालने के लिए टोंकें जरूर मुझे विश्वास है की वो अगली बार कचरा इधर उधर फेकने से पहले सोचेगा जरूर।

Saturday, April 30, 2016

LABOUR DAY

आज मजदूर दिवस  है क्या हम जानते है की ये मजदूर दिवस क्यों और कब से मनाया जाता है।  कोई नहीं चलिए मैं  बताता हूँ ,मजदूर दिवस की शुरुआत 1886 में शिकागो में उस समय हुई जब मजदूर मांग कर रहे  थे कि काम की अवधि 8 घंटे हो और सप्ताह में एक दीं छुट्टी हो। इस हड़ताल में एक अज्ञात व्यक्ति ने बम फोड़ दिया और फिर पुलिस फायरिंग में कुछ मजदूरों की मौत हो गई और कुछ पुलिस  अफसर भी मारे गए। इसके बाद 1889 में पेरिस महासभा की द्रितीय  बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारीत  किया गया की एक मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए उसी समय से दुनिया के 80 देशो में 1  मई को राष्ट्रिय अवकाश घोषित हुआ।









मजदूरी का अर्थ सेवा है ,सेवा  प्रदान करने वाला व्यक्ति ही मजदूर कहलाता है। काम करने वाला व्यक्ति चाहे खेत हो या फिर सड़क या कोई ऑफिस वो मजदूर की श्रेणी में ही आता है। क्योकि हर महीने मालिक द्वारा दिए जाने वाले वेतन पर निर्भर होता है क्युकी वो उनके लिए काम करता है। बहुत से लोग मजदूर दिवस के इतिहास से अंजान है। भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1923 में मनाया गया। जिसका सुझाव सिंगार वेलुचेट्टियर नाम के एक  कम्युनिष्ट  नेता ने   किया।

आज मजदूरों की दशा सोचनीय है क्योंकि उनको  मेनहत   के अनुसार भत्ता नहीं मिल पा  रहा। अभी मैं फ़िलहाल इतना ही  चाहूंगा क्युकी आज श्रमिक दिवस है और मैं नकारात्मक लेख नहीं लिखना चाहता।  

Monday, October 5, 2015

ये है राजनीती




हमारा देश भारत जहाँ एक तरफ हम नई उचाइयों को छू रहा है पूरे और पूरे विश्व में महाशक्ति बनने की इच्छा जाहीर कर चुका है , वही देश की राजनीति न जाने देश को क्या देना चाहती है ?
क्या हर बात पे राजनीति करना अब हमारे देश के नेताओ और विपछी दलों को सोभा देता है ।
कोई कहता है की काम नही हो रहा कोई कहता है की किसानों का हक छीना जा रहा वो ये बताए की उन्होने क्या किया ?








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क्या अब कुर्सी के लिए हमारे राजनेता किसी भी हद तक गिरने को तैयार है । अरे इन लोगों ने जब संसार के सबसे पवित्र बंधन माँ और बेटे पे राजनीति कर डाली तो अब आप ये अनुमान लगा सकते है की राजनीति कहाँ और किस दिशा मे जा रही । हमारे प्रधान मंत्री के अमेरिका दौरे पर पूछे गए एक सवाल मे माँ को लेकर भाऊक हो जाना उसको भी कुछ नेता राजनीति से जोड़ कर देख रहे है ।क्या वे इतना गिर गए की माँ के नाम ओपर भी राजनीति कर डाली ।आखिर अगर कोई काम करता है तो उसका हाथ क्यो पकड़ लिया जाता आखिर किसी को सही ढंग से काम क्यू नही करने दिया जाता ।




कितने शर्म की बात है अरे जब बोलने को कुछ नहीं है तो शांत ही रहे कम से कम अपना स्तर और नीचा तो न करे ।अभी अहल ही में देश की राजधानी से कुछ ही दूर पे हुई दादरी मे अफवाहों को लेकर एक व्यक्ति की हत्या को एक हफ्ते हो गये है। और बाकी की राजनीति के बारे मे आपको पता ही होगा क्योकि मै  किसी विशेष दल या नेता के विषय मे कुछ खास नही कहना चाहता , लेकिन इस घटना पे विवाद अभी खतम नही हुआ है इस पूरे मामले की राजनीति अब उत्तर प्रदेश से बिहार चुनाव तक पहुच चुका है। और इस बात को लेकर इतनी दिशाहीन राजनीति हो रही है।ये पूरा देश देख रहा है ।किसी ने दादरी को बाबरी से जोड़ दिया तो किसी ने माँस पे बेतुके बयान देकर राजनीति को गंदा किया ।आखिर ये लोग किस जनता को क्या समझते है ?

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21वी सदी मे हमारे राजनेता क्या लोगों को गुमराह कर पाएंगे जो धर्म के नाम पे वोट पाने की फिराक मे लगे हुये है हमारे देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है उसको पता है की उसको वोट किसको देना है आखिर ये लोग किसको गुमराह कर रहे है भोलीभाली जनता को या खुद को ये तो बिहार चुनाव का नतीजा ही बताएगा ।फिलहाल हम सिर्फ इतना चाहते है की देश मे साफ सुथरी राजनीति हो ।बस राजनीति की सियासत बन्द होनी चाहिए कोई भी किसी को भी कुछ बोल देता है अपशब्दों का प्रयोग बन्द होना चाहिए और अगर नही होता है तो हमारे देश की जनता को अब तो जागना ही होगा आखिर कब तक ऐसे लोगो को चुन कर अपने देश की राजनीति का मज़ाक बनाएँगे ।


Tuesday, January 27, 2015

Basant Panchami


बसंत पंचमी का जिक्र करते ही हमारे मन मे बदलते मौसम का ख्याल आता है या यूं कह ले की सर्दि से निजाद मिलने का आभास हो जाता है (यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है ) क्यूकि बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है जिसको हम ऋतुराज के नाम से जानते है जी हाँ बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा होता है।



 इस दिन से प्रकृति के सोंदर्य मे निखार दिखने लगता है ।पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते है और उनके नये गुलाबी रंग के पत्ते मन को मुग्ध करते है ,बसंत पंचमी को हम अलग अलग तरह से मानते है ।इस दिन को बुद्धि ,ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करके मानते हैं। लेकिन इस बसंत पंचमी की बात करे तो सर्दियों के कारण कुछ फीका जरूर पड़ गया लेकिन इसका ये मतलब नही की बसंत पंचमी को लोगों ने हल्के मे लिया हो ।

इस दिन को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप में भी मनाते हैं । इसका अपना एक अलग ही महत्व है , ये दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इस दिन हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है। और बसंत ऋतु के आने की खुशी मे हम पीले वस्त्र धारण करते है जिसको शुभ माना जाता है ।


हमारे देश में कई स्थानों पर पतंग उड़ाकर ये उत्सव मनाया जाता है, हाँलांकि ये परंपरा भारत में कुछ ही हिस्सो मे है । और जैसा की हम सब जानते है की बसंत ऋतु घूमने फिरने और खाने पीने के लिए उपयुक्त माना जाता है यानि की पूरा माह आनंद के लिए उपयुक्त होता है तभी तो बसंत को ऋतुराज कहा जाता है । 

Wednesday, December 24, 2014

बाबा और समर्थक

हमारे देश के संविधान मे किसी भी धर्म और आस्था को मानने की स्वतंत्रता दी गयी है । लेकिन क्या ये सही है, कुछ लोग इसी आस्था का फायदा उठा कर लोगों को खुले आम लूटते है और आस्था के नाम पर अपने देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ खेलते है ।



मैं बात कर रहा हूँ उन नकाब पोशों के बारे मे जो आस्था के नाम पर एक धब्बा है , जी हाँ मै बात कर रहा उन बाबाओं की जो की  आस्था के नाम पे लोगों को लूट रहे हैं खुद को साधू (संत )बताने वाले रामपाल और उसके समर्थको ने जिस तरह से (हरियाणा के हिसार में) उत्पात मचाया था ,उसके पीछे अंध श्रद्धा और गठजोड़ की ताकत ही तो थी, यही कुछ आसाराम के समर्थको ने भी किया था ।लोग जब तक समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है आखिर कब लोगों को समझ आयेगा ?



बाबा रामपाल पर हत्या ,ह्त्या के प्रयास और कई मामले दर्ज हैं और अब उनपर और उनके समर्थकों पर राष्ट्र द्रोह का मामला दर्ज किया गया है । उनके समर्थको और पुलिस के बीच टकराव का ही नतीजा था की पाँच महिलाओं और एक बच्चे की जान चली गयी थी ।


ऐसे बाबा हरियाणा मे ही नही बल्कि कहीं भी हो सकते है ,कभी जूनियर इंजीनियर रहे इस बाबा ने मात्र एक दशक मे इतना कुछ पा लिया की खुद को भगवान ही समझ बैठा ।वैसे सोचने की बात ये है की कई दफा गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद ये पुलिस के हाथ नही आ रहा था क्यूंकी ऐसे बाबा को इनके समर्थको का संरक्षण प्राप्त होता है जिससे ये आसानी से बच निकलते है , और इनकी खुद की निजी सेनाए भी होती है जो की समर्थको पर दबाव बना कर बच निकलते हैं। फिलहाल तो बाबा अभी जेल मे हैं देखना ये है की इनको क्या सजा मिलती है ।


लोगों को खुद ही ऐसे पाखंडी बाबाओं से बचना होगा खुद सही गलत की पहचान करनी होगी क्यूंकी किसी ने सच ही कहा है ‘’एक मछ्ली पूरे तालाब को गंदा कर देती है’’ तो ऐसे लोगों को समाज से बाहर निकाल फेंकना होगा ।


(फोटो इंटरनेट )