मानव जीवन के लिए सबसे उपयोगी और महत्वपूर्ण है "जल"। आपने यह तो सुना ही होगा कि "जल ही जीवन है" , लेकिन इस बात पर कभी गंभीरता से विचार किया है की आने वाले समय में जल संकट एक गम्भीर समस्या बनने वाली है। यह मैं इसलिए सचेत करवा रहा हूँ क्योंकि आज विश्व जल दिवस है । और यह पहली बार 1993 में मनाया गया था। सिर्फ जल दिवस मनाना ही समस्या का समाधान नहीं है हमें मिलकर जल संरक्षण का कार्य भी करना होगा । हमारी
जिंदगी का मुख्य केंद्र
पानी है लेकिन हम
अपनी योजनाओं में इस केंद्र
बिंदु पर ध्यान केन्द्रित
ही नहीं कर रहे
हैं जबकि हम तेजी
से विकसित हो रहे हैं।
जल संकट
गाँवों तथा शहरों में दिन प्रतिदिन पेयजल का संकट गहराता जा
रहा है । इसके पीछे कारण पेड़ों का अंधाधुंध कटान हो अथवा बढ़ती जनसंख्या या वर्षा
जल संचयन का अभाव । एक मुख्य कारण जल संकट का यह भी हो सकता है की भारत में वर्षा
कुछ माह तक ही सीमित है और वह भी अनिश्चित है ।
(Photo internet)
भारत की गिनती आफ्रिका ,आस्ट्रेलिया उत्तरी अमरीका जैसे 26 ऐसे देशो
मे की जाती है जहाँ पानी की कमी है । आज देश के 50% जिले पपनी की दृष्टि से सूखे
क्षेत्रों की श्रेणी मे आते हैं । राजस्थान बिहार , उत्तर
प्रदेश ,कर्नाटक ,आन्ध्र प्रदेश के
अधिकांश जिले बराबर सूखे की चपेट मे आते रहते हैं । मध्य प्रदेश ,दिल्ली ,गुजरात मे यहाँ तक की केरल में भी जहाँ की
जल की विपुल सम्भावनाएं हैं । लोगो को
स्वछ जल उपलब्ध नही हैं एक अनुमान के अनुसार 15 राज्यो मे भूजल स्तर 5 से 7
प्रतिशत की दर पर प्रतिवर्ष गिर रहा है , जबकि भारत की 80%
आबादी स्वछ जल हेतु भूजल पर निर्भर है ।
(Photo internet)


















