Wednesday, December 28, 2022

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न कानून "इसे भी जाने"

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम 2013
 आज हम महिलाओं को एक साथ लेकर चलने की बात करते हैं और महिलाओं और लड़कियों को जब भी अवसर मिलें हैं उन्होंने यह साबित किया है कि अगर अवसर मिले तो वह किसी से कम नहीं हैं और आज की नारी और पुरुष में कोई भेदभाव नहीं है कोई ऐसा काम नहीं है जो एक महिला और पुरुष में भेद पैदा करता हो और वह अब आधुनिक भाग दौड़ भरी जिंदगी का एक अहम पहलू हैं इसी के मध्यनजर हम यह भी जानते है की आजकल महिलाएं और लडकियाँ खुद के पैरों पर खड़ी है वह विभिन्न जगहों पर काम करती हैं चाहे वह गाँव हो या शहर हो वह भी अब अपने परिवार और अपने भरण पोषण के लिए नौकरी कर रही है और ऐसे में बात आती है महिलाओं  कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर, कई बार लोगों को पता नहीं होता है की ऐसा भी कोई कानून है जो सिर्फ और सिर्फ महिलाओं के लिए ही है जो उनको कार्यस्थल पर सुरक्षा प्रदान करता है, कभी कभी जानकारी न होने के कारण वह अपने उपर हो रहे शोषण को सहती रहती हैं जिससे उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. घर हो या सड़क खेत हो या खेल का मैदान, कालेज हो या स्कूल महिलाओं के साथ हिंसा की कोई वजह नही होती है, यह हिंसा न केवल उनके अस्तित्व को चोट पहुचाती है बल्कि उनके सेहत उनके मनोबल को भी चोट पहुचाती है, हिंसा के रूप में यौन हिंसा करना भी उत्पीडन है चाहे वह कार्यस्थल पर ही क्यों न हो रहा हो.
सन् 2013 में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम को पारित किया गया था।जिन संस्थाओं में दस से अधिक लोग काम करते हैं उन पर यह अधिनियम लागू होता है  ये अधिनियम 9 दिसम्बर, 2013 में प्रभाव में आया था। जैसा कि इसका नाम ही इसके उद्देश्य रोकथाम  निषेध और निवारण को स्पष्ट करता है और उल्लंघन के मामले में, पीड़ित को निवारण प्रदान करने के लिये भी ये कार्य करता है।
(photo internet)
कार्यस्थल पर होने वाले कुछ अवन्छिक व्यव्हार यौन उत्पीडन कहलाते है – जैसे – अनचाहे स्पर्श, गले लगना, लिपटना या चूमना, घूरना, ताकना, सिटी बजाना, आंख मारना, अश्लील हरकतें जैसे जान भूझकर चिपकना, गुप्तांगों को सहलाना, होठों पर जीभ फेरना, ऑंखें तरेरना, नोचना, चिकोटी काटना. यौन अर्थ वाले शब्द कमेन्ट, गाली, किसी भी तरह की यौनिक मंशा के साथ की गई जबरदस्ती इस हिंसा के दायरे में आती है – इसके लिए हर कार्यस्थल पर एक कमेटी बनी होती है जिसकी शिकायत आप वहां कर सकते हों और अगर कोई ऐसा व्यक्ति इसमें संलिप्त पाया गया जो इस कमेटी में है तो वह उस कमेटी से निकल दिया जायेगा और उसकी जगह कोई जब तक नहीं आ जाता तब तक निर्णय नहीं होगा या फिर जिलाधिकारी को भी इसकी शिकायत की जा सकती है और इसमें महिला मुद्दों पर काम करने वाली संस्थाओं का भी सहारा लिया जा सकता है नही तो सीधे पुलिस से भी  सकी सहायता ली जा सकती है अगर कोई महिला इसका शिकायत करना चाहती है तो यह शिकायत लिखित में होनी चाहिए 

आपके लिये यह जानना बेहद जरूरी है कि इस संबंध में नीतियां ;पोलिसीद्ध क्या कहती हैं। ताकि आप उसके अनुसार तैयारी कर पाएं। साथ ही अपने कानूनी अधिकारों को जानें। इससे संबंधिक कानूनों को पढ़ें या किसी कानूनी जानकार से विकल्पों के बारे में जानकारी लें।
सबसे पहला कदम ये उठाएं उत्पीड़न के मामले में जो सबसे पहला कदम उठाना चाहिये वो ये है किए आप सीधा जाकर उस व्यक्ति से बात करें जो आपको परेशान कर रहा है। और उसे इस बात का अंदेशा दें कि आप बर्दाश्त करने वाले या चुप रहने वालों में से नहीं हैं। उसे इस संबंध में एक लिखित चेतावनी भी दें। यदि उससे बात कर कोई फायदा न होए तो अपने सानियर से इसकी शिकायद करें। अपने एचआर ;ह्यूमन रीसोर्सद्ध मैनेजर को भी इसमें शामिल करेंए ताकि वे आपको आगे की कार्रवाई के बारे में सूचित कर सकें। इस मामले को अब लिखित बनाएं।
पीड़ितों और गवाहों को जुटाएं इस बात की पूरा संभावना है किए आपको परेशान कर रहे व्यक्ति ने पहले भी लोगों के साथ उत्पीड़न किया होए या वो हाल में भी और लोगों के साथ ऐसा करता या करती हो। उन लोगों से बात करें और उन्हें एक साथ जुटाने की कोशिश करें। अपने लिये किसी प्रत्यक्ष गवाह को तैयार करने की कोशिश करें। जितने हो सके सबूत जुटाएं। बाकी पीड़ितों से भी लिखित सूचना या चेतावनी देने का आग्रह करें ताकि आप सभी का केस मजबूत बन पाए। इसके बाद सीनियर मैनेजमेंट से इस संबंध में बात करें। उनके सामने सभी संभव सबूत ले जाएं। उत्पीड़न करने वाले के खिलाफ मुकदमा करें
अपने विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए वकील से सलाह लें। स्पष्ट रहें और सुनिश्चित कर लें कि आप बदले में क्या चाहते हैं जैसे मुआवजा या अगर आपको नौकरी से निकाल दिया गया होए तो अपनी नौकरी में वापसी।

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