Friday, May 20, 2022

जेंडर और सेक्स क्या है ?

मैं समाजिक पिछले कुछ सालों से सामाजिक क्षेत्र से जुड़ा हूँ जहाँ मुझे महिलाओं, पुरुषों, किशोर - किशोरियों और बच्चो के साथ काम करने का अनुभव हुआ है, मुझे लगा की कुछ प्राथमिक जानकारियां जो की बेसिक हैं क्यों न उनपर कुछ लिखा जाय मेरा लिखना भी हो जायेगा क्युकी इंटरनेट पर जानकारियां तो बहुत हैं लेकिन हमको जो चाहिए वह नहीं बहुत ज्यादा जानकारियां है मुझे लगा कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर लिखने से सामाजिक दिशा में चल रहे प्रयासों की तरफ एक कदम भी बढ़ेगा. जिस तरह से मैं शोषित तथा वंचित समुदाय को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए कार्यरत हूँ जिसमें कुछ विषय हैं जो बहुत ही छोटे लगते हैं लेकिन हमारी जिंदगी में बहुत अहमियत रखते हैं जैसे – महिला स्वास्थ्य, जेंडर, समता- समानता, SRHR को लेकर कुछ अहम् जानकारियों को लिखने का प्रयास करता रहूँगा. आने वाले समय में मैं इन विषयों पर और फेमिनिस्ट मुद्दों पत भी लिखने का प्रयास करूंगा.

जेंडर और सेक्स में क्या अंतर होता है ?
जेंडर एक सामाजिक विचार धारा है और जेंडर इंसानों द्वारा बनाया गया है जेंडर में पर्रिवर्तन हो सकता है, जेंडर स्थान के बदलने के  साथ बदलता रहता है, जेंडर सार्वभौमिक नहीं होता है.

सेक्स क्या होता है ?

सेक्स जैविक होता है. यह प्रकृति द्वारा प्राप्त होता है सेक्स में इंसानों के जननांगो में विभिन्नताए पाई जाती है जैसे स्तन , योनी , शिश्न . महिला और पुरुष को अलग बनाते है और लिंग को बदला नही जा सकता हाँ आजकल विज्ञानं की सहायता से इसको बदला जा सकता है लेकिन अगर विज्ञानं का सहारा न लिया जाय तो इसको बदला नहीं जा सकता है. सेक्स को बदला नही जा सकता 

इसको एक उदहारण से अगर समझना हो तो हम ऐसे देख सकते हैं –

क्या पुरूषों द्वारा किसी नवजात शिशु को दूध पिलाया जा सकता है? आपके मन में क्या आया ?

नहीं ......   यही आपके मन में आया न.. ये हैं जेंडर क्युकी यह धारणा हमारे मन में इसलिए है क्युकी हम सोचते है की पुरुष ऐसा कोई काम नहीं कर सकता है -

हाँ पुरुष शिशु को दूध पिला सकता है लेकिन स्तन पान नहीं करा सकता है इसमें शिशु को दूध तो कोई भी पिला सकता है बोतल से लेकिन स्तन पान सिर्फ महिला करा सकती है तो इसमें हमारी धारणा बन चुकी होती है की पुरुष बच्चो को नहीं सम्भाल सकते यह जेंडर है और स्तन पान करवाना जैविक है इसलिए वह सेक्स कहलाता है.
समुदाय में हम इस तरह के भी उदहारण को पेश कर सकते हैं .


किस तरह से हमारे समाज और परिवार में जेंडर आधारित हिंसा या भेदभाव देखने को मिलता है   जैसे लडको को कही भी आने जाने की आज़ादी होती है लेकिन लड़कियां अपनी मर्ज़ी से कही आ जा नहीं सकती है , लड़के शहर जाकर पढ़ सकते हैं लेकिन लड़कियों को अपनी मर्ज़ी से पढने की आज़ादी नही और कही बाहर जाकर पढने नही दिया जाता है, लड़कियों को घूंघट में रहना पड़ता है लेकिन लडके कुछ भी पहन सकते है लडको को निर्णय लेने का अधिकार होता है लेकिन घर में लड़कियों को निर्णय लेने का कोई अधिकार नही दिया जाता है , लडकियों से ज्यादा काम करवाया जाता है 

                                                                                                                                                              

  धन्यवाद 

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