Wednesday, May 11, 2016

दहेज़ एक समस्या

आज दहेज़ प्रथा हमारे समाज का एक ऐसा दीमक बन गया है जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। अगर घर में लड़की जन्म लेती है तो कुछ घरो में तो लोग उसकी परवरिश से ज्यादा चिंता उसकी शादी के दहेज़ के लिए करने लगते है । कुछ लोग तो सोचते है की बस कुछ ले दे के लड़की की शादी कर दो बस उनकी जिम्मेदारी ख़तम । और यही कारण है की आज दहेज़ हत्या दिन ब दिन बढ़ रही है । सरकार को इसके लिए कारगर कदम उठाने चाहिए क्योंकि महिलाओ पर हो रहे अत्याचार पर अंकुश लगाया जाय।


(फ़ोटो इंटरनेट)

एक आंकड़े के अनुसार दहेज़ हत्याए पहले से कुछ ज्यादा ही बढ़ी है इसके अनुसार 2007 से  2011 के बिच काफी हद तक नए मामले सामने आये है। 2012 में 2833 दहेज हत्या के मामले सामने आये । जो की 2011 में 2618 थी,2013 में ये बढ़कर 10709 हो गयी।अगर औसतन बात करे तो हर एक घण्टे में एक महिला की दहेज़ को लेकर हत्या होती है । जो की बहुत ही शर्मिंदगी की बात है। समाज में काफी कुछ बदल गया लेकिन ये दहेज़ प्रथा न बदल पाये ।


दहेज़ लेना या देना कानूनन अपराध है और इसके खिलाफ कार्यवाही भी होती है और अगर ऐसी कोई घटना हो तो उसकी शिकायत अवश्य कराये क्योंकि कभी कभी समाज के डर से बहुत सी महिलाये अपने साथ होने वाले दहेज़ उत्पीड़न को अपने परिवार या जानने वाले को नही बता पाती है और इसका फायदा  वो लोग उठाते है जो दहेज़ के भूखे होते है वो महिलाओ को मानसिक और शारीरिक रूप से कष्ट देते है जो की कानूनन अपराध है । महिलाओ के लिए सरकार द्वारा कई कारगर कदम उठाये जा रहे है । उसके बाद भी अगर ऐसी घटनाये होती है कितने शर्म की बात है लोग बदलाव की बात करते है लेकिन खुद को नही बदलते क्योंकि जब आप बदलेंगे तभी समाज बदलेगा।
keep change

Sunday, May 8, 2016

MOTHER DAY

आज मदर डे है और ये कोई बताने की बात नही है की माँ बच्चों के दिल में एक खास जगह रखती है। माता,माँ,मॉम,मम्मी नाम अनेक लेकिन रिश्ता और स्नेह एक ही है। मदर डे हर साल मई में दूसरे सफ्ताह के रविवार को मनाया जाता है। जिसको लोग अपनी अपनी तरह से मानते है। एक माँ 100 शिक्षको से ज्यादा ज्ञान अपने बच्चे को देती है और कहा जाता है की माँ ही बच्चे की प्रथम पाठशाला होती है। 


(फ़ोटो इंटरनेट)

माँ के किरदार को हमारे सिनेमा ने भी खूब सराहनीय ढंग से पेश किया है । समय समय पर ऐसी फिल्में आती है जिसमे माँ का किरदार काफी दमदार और भावनात्मक होता है । मदर इन्डिया से लेकर निल बटे सन्नाटा तक फिल्मो में माँ की एक अहम् भूमिका रही है 50-60 के दशक में माँ का किरदार फिल्मो में काफी महत्वपूर्ण रहता था और दिवार फ़िल्म का डाइलॉग "मेरे पास माँ है" आज भी लोगो के जहन में ज़िंदा है ।
















(फ़ोटो इंटरनेट)
माँ तो माँ ही होती है लेकिन समय के साथ साथ आजकल माँ ने आधुनिक माँ का रूप ले लिया है जो की अपने बच्चों की माँ के साथ एक अच्छी मित्र भी है । क्युकी जिस तरह से डिजिटलाइजेसन बढ़ा है माँ ने अपने बच्चों का साथ दिया है।
क्योंकि जब कोई संकट आती है तो पहले माँ ही याद आती है और कहीं न कहीं इंसान की सफलता में उसकी माँ का अहम् रोल होता है।माँ ही हमे बचपन में अच्छे बुरे की पहचान बताती है और एक सही मार्गदर्शक का रूप निभाती है ।
आप कितना भी अच्छा खाना खाते हो लेकिन माँ के हाथ के खाने की बात ही कुछ और होती है। यहाँ ये कहना गलत नही होगा की भगवान ने अपनी जगह माँ को हमारे बिच भेजा है। जीवन में सफलता पानी है तो अपनी माँ के द्वारा दिखाए मार्ग पर चले सफलता अवश्य मिलेगी। माँ के विषय में जितना लिखो उतना ही कम हैं। 

Friday, May 6, 2016

swach bharat abhiyan

हमे अपने वातावरण को साफ सुथरा रखना चाहिए ये तो सब जानते है लेकिन इस बात पर अमल कौन करता है । और अगर सही कहे तो हमारे समाज में गंदगी की भी एक जगह बन गयी है या ये कह सकते है की गन्दगी की भी समाज में जगह है ।हमे कुछ देखने को मिले न मिले कहीं न कहीं कचरे का ढेर लगा जरूर दिखेगा, बस उनकी शक्ल या फिर मात्रा अलग अलग हो सकती है । और इस परेशानी से निपटने के लिए ही हमारे देश के प्रधानमंत्री ने देश में स्वछ भारत अभियान की शुरुआत की। शुरूआती दौड़ में बड़े नामी गिरामी लोगो ने बढ़ चढ़ क़र सफाई अभियान में हिस्सा लिया । जो की बहुत ही गर्व की बात है । लेकिन दुख की बात यह है की कुछ लोगो ने शुरूआती दिनों में एक या दो दिन इस अभियान में सफाई करते हुए अपनी फ़ोटो मिडिया में और सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे शेयर की । और कुछ ने तो साफ जगह को ही साफ डाला और कुछ ने तो बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और यह सही भी है और कहीं न कहीं बदलता और स्वछ भारत नज़र भी आ रहा था लेकिन अब काफी दिन बीत जाने के बाद कुछ लोग अपनी जिम्मेदारी को भुल गए है ये स्वछ भारत अभियान किसी एक का नही है ये पुरे देश के लिए और हर एक नागरिक के उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की हमारे देश के लिए ।
लेकिन कुछ लोग कहते है की ये मेरा काम थोड़े ही है लेकिन क्या वो अपने घर को साफ नही करते ।
स्वछ भारत के अभियान को सफल बनाये काफी दिन से मुझे लग रहा हैं कि  कही फिर से लोग भूल तो नही गए इस अभियान को अपनी जिम्मेदारियों को समझे और स्वछ बनाने में अपने देश का साथ दे।
कभी कभी ऐसा भी होता है की हमारा शहर अचानक  बहुत साफ दिखने लगता है तो हम आपस में पूछते है की क्या कोई आने वाला है क्या? जैसे कोई मंत्री या बड़ा नेता । क्योंकि जब कोई शहर में आने वाला होता है तो सड़क से लेकर नुक्कड़ तक साफ़ करवा दिए जाते है तो आने वाले को पता ही नही चल पता की शहर में गन्दगी है या नही । लेकिन क्या ये बिना किसी के आये रोज़ नही हो सकता ? हो सकता है लेकिन कोई अपनी जिम्मेदारियो को समझता नही ।
जो कहीँ कचरा फेके उसे एक बार कूड़ेदान में डालने के लिए टोंकें जरूर मुझे विश्वास है की वो अगली बार कचरा इधर उधर फेकने से पहले सोचेगा जरूर।