Wednesday, December 24, 2014

बाबा और समर्थक

हमारे देश के संविधान मे किसी भी धर्म और आस्था को मानने की स्वतंत्रता दी गयी है । लेकिन क्या ये सही है, कुछ लोग इसी आस्था का फायदा उठा कर लोगों को खुले आम लूटते है और आस्था के नाम पर अपने देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ खेलते है ।



मैं बात कर रहा हूँ उन नकाब पोशों के बारे मे जो आस्था के नाम पर एक धब्बा है , जी हाँ मै बात कर रहा उन बाबाओं की जो की  आस्था के नाम पे लोगों को लूट रहे हैं खुद को साधू (संत )बताने वाले रामपाल और उसके समर्थको ने जिस तरह से (हरियाणा के हिसार में) उत्पात मचाया था ,उसके पीछे अंध श्रद्धा और गठजोड़ की ताकत ही तो थी, यही कुछ आसाराम के समर्थको ने भी किया था ।लोग जब तक समझ पाते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है आखिर कब लोगों को समझ आयेगा ?



बाबा रामपाल पर हत्या ,ह्त्या के प्रयास और कई मामले दर्ज हैं और अब उनपर और उनके समर्थकों पर राष्ट्र द्रोह का मामला दर्ज किया गया है । उनके समर्थको और पुलिस के बीच टकराव का ही नतीजा था की पाँच महिलाओं और एक बच्चे की जान चली गयी थी ।


ऐसे बाबा हरियाणा मे ही नही बल्कि कहीं भी हो सकते है ,कभी जूनियर इंजीनियर रहे इस बाबा ने मात्र एक दशक मे इतना कुछ पा लिया की खुद को भगवान ही समझ बैठा ।वैसे सोचने की बात ये है की कई दफा गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद ये पुलिस के हाथ नही आ रहा था क्यूंकी ऐसे बाबा को इनके समर्थको का संरक्षण प्राप्त होता है जिससे ये आसानी से बच निकलते है , और इनकी खुद की निजी सेनाए भी होती है जो की समर्थको पर दबाव बना कर बच निकलते हैं। फिलहाल तो बाबा अभी जेल मे हैं देखना ये है की इनको क्या सजा मिलती है ।


लोगों को खुद ही ऐसे पाखंडी बाबाओं से बचना होगा खुद सही गलत की पहचान करनी होगी क्यूंकी किसी ने सच ही कहा है ‘’एक मछ्ली पूरे तालाब को गंदा कर देती है’’ तो ऐसे लोगों को समाज से बाहर निकाल फेंकना होगा ।


(फोटो इंटरनेट )

Monday, November 3, 2014

ढंग की बात

इस देश मे कई ऐसे गंभीर मुद्दे है जिनपर कानून तो बहुत बनाए गए लेकिन सरकारें ज्यादा ध्यान नही देती कई ऐसी छोटी छोटी बातें है जैसे सफाई ही ले लीजिये हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने भारत को स्वछ भारत बनाने का अभियान जो चलाया है, जिसमे क्या नेता और क्या अभिनेता यहाँ तक की क्रिकेट के भगवान  ने इस अभियान का हिस्सा बन कर ये बता दिया है की अगर इरादे नेक हों तो मंजिल तक पहुँचने से कोई नही रोक सकता ।


अभी जल्द ही प्रधान मंत्री जी ने  अपनी बात सीधे जनता से करने का एक नया माध्यम ढूंढ निकाला है , जी हाँ मै  बात कर  रहा हूँ ‘’मन की बात ‘’ रेडियो के माध्यम से प्रधान मंत्री जी ने तीन अक्टूबर को पहली बार विभिन्न मुद्दों पे अपने मन की बात सीधे सीधे जनता से कह डाली थी ,यही हुआ इस रविवार रेडियो के लगभग सभी स्टेशनों (F.M,S.W,M.W) से ये प्रोग्राम प्रसारित किया गया । 







प्रधान मंत्री ने लगभग 20 मिनट तक अपनी बातें प्रकट किं जिसमें  कई ऐसे निम्न स्तर की समस्याए है जो आम जनता के लिए काफी हद तक हानिकारक साबित हो रही है । श्री मोदी ने शारीरिक अक्षमता , नशा मुक्ति , बाल स्व्छ्ता जैसी बातों पर ज़ोर दिया । आज कल लोगो के मन मे उठ रहे काले धन को लेकर जो भी सवाल थे उन्होने लगभग उसका भी समाधान कर दिया उन्होने काले धन को लेकर कहा की वो उसको लाने में काफी ढृड़ है और गरीबो का पैसा जो ब्लैक मनी के रूप मे दूसरे देशो मे जमा है उसको ला कर ही दम लेंगे । ये उनके विरोधियों के लिए भी एक मुहतोड़ जवाब था  जो की इस मामले मे बोलने का एक अवसर पा गए  थे परंतु ‘’मन की बात’’ के बाद उनको भी जवाब मिल ही गया  होगा । 


जहां कुछ नहीं था वहाँ एक आशा की किरन  तो नजर आने लगी है कहते है ना की डूबते को तिनके का सहारा ही बहुत होता है और जनता को अब इस कार्यक्रम के बाद मोदी जी से और आशाएँ होना जायज है ये तो वक्त ही बताएगा की क्या होता है पर बहुत दिनो के बाद लग रहा है जैसे की अब की हो किसी सरकार ने जनता के लिए ‘’ढंग की बात’’ 

Saturday, October 25, 2014

अगला हाथ हमारा

भारत में  हर साल सड़क दुर्घटना मे लाखों लोग मारे जाते हैं । और एक समाचार पत्रिका के अनुसार भारत मे एक साल मे दस लाख से भी ज्यादा मौते सड़क दुर्घटना मे होती हैं ,ये एक चिंता का विषय है इसको हमें गंभीर रूप से लेना होगा । 



पिछले कुछ सालों मे वाहनों की तादात में  इजाफा हुआ है जिसके कारण यह आकड़ा तेजी से बढ़ा है ।
इसका कारण है की शराब पी कर वाहन चलना ,यातायात नियमों का पालन ना करना , मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते समय करना और रफ्तार मे ओवरटेक करने की कोशिश करना । 




लेकिन क्या कोई और कारण नही है ? क्या इससे होने वाली मौतों को हम कम कर सकते है? जी हाँ बिल्कुल कर सकते है अक्सर ये देखा जाता है की सड़क पर कोई हादसा हो जाता है और कोई इंसान जिसका एक्सीडेंट हो गया वो सड़क पर तड़पता रहता है और उसकी मदद करने के लिए कोई भी नही आता लेकिन लोग वहा इकट्ठा होकर पुलिस या एम्ब्युलेन्स आने का इंतज़ार करते है ।लगभग 90% लोग सिर्फ तमाशा ही देखते है सिर्फ  10% लोग ऐसे होते है जो मदद को आगे आते है क्या आपने कभी सोचा है की आपके एक हौसले भरे कदम से किसी की जान भी बच सकती है । 







एक्सीडेंट के बाद प्राथमिक उपचार से भी जान बच सकती है, नहीं ट्रामा सेंटर लेकिन पास के किसी अस्पताल तक तो ले जा सकते हैं, या फिर पुलिस और एम्ब्युलेन्स बुलाने मे आप मदद कर  सकते है । तो आखिर हम क्यूँ किसी का इंतजार करते है ? खुद क्यूँ नहीं आगे आते आखिर कब तक हम एक दूसरे को ब्लेम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी को खुद समझना होगा और आगे आकर हेल्प करना होगा । तो आज ही आपको  ये तय कर लेना चाहिए की जो पहला मदद  का हाथ हो वो आपका हो । 
(फोटो इंटरनेट..)

Monday, October 20, 2014

आगाज हो चुका है



क्या एक बड़े बदलाव बिगुल बज गया है ? मै आज बात कर रहा हूँ, भारतीय राजनीति की जहाँ कितने सालों के बाद एक बदलाव देखने को मिला हैं, लोकसभा चुनाव मे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद अभी हाल ही मे हुये हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा के चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे उभर  कर सामने आई है, और इससे ये साफ झलकता है की लोकसभा चुनाव के पाँच महीने बाद भी मोदी का असर अभी भी लोगों पे बरकरार है। हालांकि ये बात तो सच है की महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ अपने दम पर सरकार बनाने का सपना तो साकार नही हो पाया, लेकिन इसको भी नकारा नही जा सकता की उद्धव ठाकरे के अहंकार को करारा जवाब मिला है । 


आज जनता ये जान चुकी है की किसको चुनना है , हालांकि एनसीपी ने भाजपा को बाहर से समर्थन देने का एलान स्पष्ट कर दिया है की काग्रेस से अलग यू ही नही हुये थे, नरेंद्र मोदी के सघन प्रचार के बाद भी आखिर अस्सी से अधिक सीटे ले आई है । लेकिन उधर हरियाणा मे जुरुर भाजपा की ये के शानदार जीत है , जिस राज्य मे भाजपा ने कभी बिना सहयोगी दल के बगैर चुनाव लड़ा ही न हो और लड़ा भी तो भी इतनी उत्साह जनक सफलता नही मिल रही हो, वहा अकेले दम पर सभी सीटो पर चुनाव लड़ कर पर्याप्त मात्रा(47 सीटे ) मे सीटे जीतना कोई आम बात नही है ये भी एक चमत्कार ही है ।


इसमे कोई दो राय नही है की हरियाणा में काग्रेस की पराजय का कारण उसकी खराब छवि और सत्ता विरोधी मोदी लहर जिम्मेदार है मोदी लहर का एक प्रमाड़ तो यही है की मुख्यमंत्री का चेहरा सामने न रखकर भी इतनी शानदार जीत हासिल की है । इनोले प्रमुख का जमानत पर बाहर आकर चुनावी रैली करना किसी काम नही आया,हरियाणा का ये चुनाव नतीजा सभी स्थानीय पार्टियो के लिए एक चेतावनी है ,जो अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए जाती वाद और छेत्रवाद का सहारा लेती रहती है हरियाणा के मतदाताओ ने इस तरह की राजनीति को नकार कर बदलाव की तरफ वोट दिया है । 


लिहाजा ये भाजपा और उनकी पार्टी वालों के लिए भी एक अग्नि परीक्षा से कम नही उनको भी जनता के विश्वास पर खरा उतरना होगा और  भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन पर ज्यादा ध्यान देना होगा । 

(फोटो इन्टरनेट)

Tuesday, September 23, 2014


ये कैसी आजादी है !


बेशक  हम  आजाद है । मगर इस आजादी के मायने क्या है ? 65 सालो से आजाद इस देश की पहचान क्या है ?किस्सों और किताबों को पीछे छोड़ कर अगर आप इस सवाल को ढूंढ़ने निकलेंगे तो आपको दो तस्वीर      दिखाई देंगी ।  क्या आपने कभी महसूस किया है की देश की                 उन  तस्वीरों  में एक तरफ सवरता इंडिया  है दूसरी तरफ 
                                                                              बिलखता भारत । 

शिक्षा के केंद्र मैं अशिक्षित 


दुनिया के नक्शे पर भारत की छवि एक उभरते एजुकेशन हब की है और यही वह भारत है जो सबसे ज्यादा अशिक्षित आबादी वाले देशों की सूची में शुमार है।

भारत में जिस उम्र के बच्चों को पढ़ना चाहिए वह छोटी-बड़ी दुकानों में काम करते दिख जाएंगे। अपने गरीब मां-बाप का हाथ बटाने के लिए मजदूरी करतें हैं। जिस उम्र में उनके हाथ में किताबों और खिलानों के बजाय फूल बेचते नजर आते है। उनका बचपन छिन-सा जाता है। अशिक्षा की दहलीज पर उनका कदम उन्हें भी नहीं पता।



बरबादी और भूख । 


विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कुपोशित बच्चों की संख्या के मामले मे भारत का दूसरा स्थान है।

 इसी देश में दूसरी तस्वीर खाद्यानों के भण्डारण में भी नजर आती है। एक और भूख और कुपोसण है जहा बच्चे, बुजुर्ग भूख से तड़पते है, जहां महंगाई के कारण एक गरीब मजदूर दो वक़्त की रोटी नहीं जुटा पाता। वहीं दूसरी ओर सरकारी विभागों में अनाज सड़ता नजर आता है। भण्डारण की सही व्यवस्था न होने से खाद्यानों की बर्बादी लगातार जारी है। क्या किसी से भूख से मरने वालों की जान की कोई कीमत नहीं 
है


क्या हम सब  एक हैं ?

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देष है। जहां विभिन्न धर्म और जाति के लोग रहतें है। यहीं हर रंग हर मजहब के लोग है। राजनैतिज्ञों ने हमेशा जाति और मजहब के नाम पर खूब वोट बैंक भरे है जिन्होंने समय के साथ दंगों का रुप ले लिया। हम एक तो  है हमें अलग करने की राजनीति कर  रहे है ये राजनैतिज्ञ। हम गर्व से हमेशा कहते है,हम हिन्दु है ,मुस्लिम है,सिख है,इसाई है पर हम इतने पढे़ लिखे होने के बावजूद स्वयं को हिन्दुस्तानी कब बोलेगें ।



क्यों है ऐसी  तस्वीर -
जब भगवान भी हमारे ख़ून का रंग नहीं कर सका अलग 
तो हम क्यों मजहब के नाम पर बट जाते हैं ?


आजाद भारत गुलाम किसान 

इस देश की 60% आबादी आज भी खेती किसान पर निर्भर है। इस आबादी में पिछलें पन्द्रह सालों के आत्महत्या के आकड़े 2,50,000 की संख्या पार कर चुके है।
                        यहां किसानों को अपनी कृशि के लिए कर लेना पड़ता है। जहां तक है बिना कर के 70% किसान खेती करने में असमर्थ है। करीब 40 -50 साल से राश्ट्रीकृत बैंक और एजेंसी कर दे रहीं है।

सरकार  का मूल उद्देश्य बैंकों द्वारा लोगों के सोशल अपलिफमेन्ट में सहभागीदार बनना और विषेशकर किसानों को साहूकारों से छुटकारा दिलाना था, परन्तु इतने साल बीतने के बाद भी किसान साहूकारों के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाये । क्यों ?


कैसे करेंगे कन्या पूजन 

भारत मैं  कन्या को देवी की तरह पूजा जाता  है । यहीं उलट कन्या भ्रूण हत्या के मामलों को बढ़ती लगातार लिगं अनुपात को प्रभावित कर रही है ।पंजाब ,राजस्थान जैसी जगहों पर आज भी ऐसे मामले देखने को मिलेंगे ।

सबको माँ  चाहिए ,बहन चहिये ,तो फिर बेटी क्यों नहीं चहिये ?




फोटो (इंटरनेट )

Sunday, September 21, 2014

courting corruption

                         
 ''बस थोड़ा बदलाव चाहिए'' 

फांसी  के तख़्त पर  शांत और निडर भाव  से  खड़े एक व्यक्ति के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। एक मुस्कान के साथ गुनगुना  रहा  था-

          सरफ़रोशी  की तमन्ना अब हमारे दिल में है 
           देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है 
                            वन्दे मातरम !

युवक का शरीर  फंदे झूल  गया। वो थे भगत  सिंह भला  उनका कसूर क्या था। क्या बस इतना ही  की  वो देश को  गुलामी से आजाद कराने की तमन्ना  रखते  थे। वो तो देश की  आजादी के लिए शहीद  हो गए।  पर क्या हम  आजाद   है? बात कुछ  अजीब सी है पर है  सौ टके  का सच।

मैं  बात कर रहा  हूँ भ्रष्टाचार की।भारत के अंदर किसी भी क्षेत्र में जाए भरष्टाचार का फैलाव  और उसकी जकड़ साफ़ दिखाई  देती है  भारत  के सरकारी व गैर सरकारी व गैरसरकारी विभाग भी  भ्रस्टाचार  से  अछूते  नहीहै। अपना काम कराने के  लिए  रिशवत देनी पड़ती  हैं। मंत्री हो या संतरी  फाइल आगे  करानी हो  तो भी कुछ पैसे उन्हें दीजिये।


स्कूल ,कॉलेज भी नही है अछूते 

स्कूल,कॉलेज भ्रस्टाचार   अछूते  नहीं  है। फर्क बस  इतना  है इनके  तरीके  अलग  है। वो  गरीब बच्चे  जो कुछ कर दिखाने  का सपना रखते  है उनके रिस्वत  आड़े आ जाती  है। कहते  है सपने  उन्ही के पूरे  होते है जो कुछ कर  दिखाने की तमन्ना  रखते  है। पर आज भ्रस्टाचार के इस  युग  में सबके सपने अधूरे जाते  है| ये  सब  बातें  निअर्थक और  खोखली लगती   है।


बदलाव मांगती बैंक 

अर्थववस्था का आधार स्तंभ माने  जाने वाले बैंकों  भी  भ्रस्टाचार के  रोग  से अछूते  नही हैं। आप किसी प्रकार के लोन के  लिए  आवेदन  करें तो  बिना  किसी परेशानी  के फाइल निकल जाये ये नही।

पुलिस का  क्यों है ये रवईया   

 देश की आंतरिक व्वयवस्था का भार पुलिस पर होता  है पर वे भी रिशवत  लेकर  गुनाहगारो  को छोड़ देते है।  क्या ये  गुनाह को बढ़ावा देना नही है ?

 इंसान की प्रवत्ति होती है वहां सफाई  से  रहता  है तो वो भ्रस्टाचार जैसी बुराई  को  साफ  कर  समाज में   क्यों  नहीं रहता ?

सावल है की हम भ्रस्टाचार  मिटाये  कैसे? ज्यादा  तर लोग कहेंगे " आसान नही है क्युकि इंसान बुरा है   " मेरा  मानना  है  इंसान  जन्म बुरा से  नही  होता है परिस्थितियाँ  उन्हें  बुरा  बनाती है।  तो हम उन परिस्थितियों को क्यों नही  बदलते ?अपनी  सोच को क्यों नही बदलते ?


 हम  सिर्फ  किसी एक व्यक्ति या  संगठन को बदल कर भ्रस्टाचार नहीं मिटा  सकते  पर  अपने  को  बदल कर समाज में बदलाव जरूर ला सकते  है।  मनोबल बड़ा के भ्रस्टाचार से दूर रहे और अपने  काम के प्रति वफादार रहना रहे ।रिसवत देकर  भ्रस्टाचार को बढावा ना दें । भ्रस्टाचार के खिलाफ खड़े हो,उसके साथ नहीं । कल का भविष्य, सरकार से पहले आपके हाथ में है ।
                                               
                                             बस थोड़ा सा बदलाव ही तो चाहिए । 
                                            






फोटो (इंटरनेट )