Sunday, September 21, 2014

courting corruption

                         
 ''बस थोड़ा बदलाव चाहिए'' 

फांसी  के तख़्त पर  शांत और निडर भाव  से  खड़े एक व्यक्ति के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। एक मुस्कान के साथ गुनगुना  रहा  था-

          सरफ़रोशी  की तमन्ना अब हमारे दिल में है 
           देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है 
                            वन्दे मातरम !

युवक का शरीर  फंदे झूल  गया। वो थे भगत  सिंह भला  उनका कसूर क्या था। क्या बस इतना ही  की  वो देश को  गुलामी से आजाद कराने की तमन्ना  रखते  थे। वो तो देश की  आजादी के लिए शहीद  हो गए।  पर क्या हम  आजाद   है? बात कुछ  अजीब सी है पर है  सौ टके  का सच।

मैं  बात कर रहा  हूँ भ्रष्टाचार की।भारत के अंदर किसी भी क्षेत्र में जाए भरष्टाचार का फैलाव  और उसकी जकड़ साफ़ दिखाई  देती है  भारत  के सरकारी व गैर सरकारी व गैरसरकारी विभाग भी  भ्रस्टाचार  से  अछूते  नहीहै। अपना काम कराने के  लिए  रिशवत देनी पड़ती  हैं। मंत्री हो या संतरी  फाइल आगे  करानी हो  तो भी कुछ पैसे उन्हें दीजिये।


स्कूल ,कॉलेज भी नही है अछूते 

स्कूल,कॉलेज भ्रस्टाचार   अछूते  नहीं  है। फर्क बस  इतना  है इनके  तरीके  अलग  है। वो  गरीब बच्चे  जो कुछ कर दिखाने  का सपना रखते  है उनके रिस्वत  आड़े आ जाती  है। कहते  है सपने  उन्ही के पूरे  होते है जो कुछ कर  दिखाने की तमन्ना  रखते  है। पर आज भ्रस्टाचार के इस  युग  में सबके सपने अधूरे जाते  है| ये  सब  बातें  निअर्थक और  खोखली लगती   है।


बदलाव मांगती बैंक 

अर्थववस्था का आधार स्तंभ माने  जाने वाले बैंकों  भी  भ्रस्टाचार के  रोग  से अछूते  नही हैं। आप किसी प्रकार के लोन के  लिए  आवेदन  करें तो  बिना  किसी परेशानी  के फाइल निकल जाये ये नही।

पुलिस का  क्यों है ये रवईया   

 देश की आंतरिक व्वयवस्था का भार पुलिस पर होता  है पर वे भी रिशवत  लेकर  गुनाहगारो  को छोड़ देते है।  क्या ये  गुनाह को बढ़ावा देना नही है ?

 इंसान की प्रवत्ति होती है वहां सफाई  से  रहता  है तो वो भ्रस्टाचार जैसी बुराई  को  साफ  कर  समाज में   क्यों  नहीं रहता ?

सावल है की हम भ्रस्टाचार  मिटाये  कैसे? ज्यादा  तर लोग कहेंगे " आसान नही है क्युकि इंसान बुरा है   " मेरा  मानना  है  इंसान  जन्म बुरा से  नही  होता है परिस्थितियाँ  उन्हें  बुरा  बनाती है।  तो हम उन परिस्थितियों को क्यों नही  बदलते ?अपनी  सोच को क्यों नही बदलते ?


 हम  सिर्फ  किसी एक व्यक्ति या  संगठन को बदल कर भ्रस्टाचार नहीं मिटा  सकते  पर  अपने  को  बदल कर समाज में बदलाव जरूर ला सकते  है।  मनोबल बड़ा के भ्रस्टाचार से दूर रहे और अपने  काम के प्रति वफादार रहना रहे ।रिसवत देकर  भ्रस्टाचार को बढावा ना दें । भ्रस्टाचार के खिलाफ खड़े हो,उसके साथ नहीं । कल का भविष्य, सरकार से पहले आपके हाथ में है ।
                                               
                                             बस थोड़ा सा बदलाव ही तो चाहिए । 
                                            






फोटो (इंटरनेट )                                        
     



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