Sunday, May 28, 2023

28 May MHM Day, World Menstrual Hygiene Day

हर साल 28 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय माहवारी स्वच्छता प्रंधन दिवस  (World Menstrual Hygiene Day) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य माहवारी  स्वच्छता  (menstrual hygiene) और इससे जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है. मेंस्ट्रुअल हाइजीन महिलाओं की सेहत (Women Health) से जुड़ा एक बेहद अहम पहलू है. इसका सीधा संबंध महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हेल्थ से होता है. 
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लेकिन अक्सर हमारे समाज में माहवारी को लेकर आज भी बहुत पर्दा है लोग कहकर बात नहीं करते है खासकर माहवारी को लेकर पुरुष और लड़के अपनी चुप्पी बनाये रखते है वह खुलकर इसपर चर्चा नहीं करते है. पुरुषों और लड़कों को महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को समझना होगा और यह जो भ्रांतियां और चुप्पी है उसपर कहकर बात करनी होगी. माहवारी पर चर्चा न कोई घर में करता है और न ही कोई बाहर करना चाहता है चलो एक बार मान लिया की लोग घर के बाहर इसपर चर्चा करते हैं लेक्रिन क्या उनको सही जानकारी होती है और अगर सही जानकारी नहीं है माहवारी को लेकर तो ऐसे लोग तो भ्रान्ति और सामाजिक रुढियों को ही मानेंगे न.
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आइये जानते है. क्यों यह 28 मई को ही मनाया जाता है -
2013 में जर्मन नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन WASH यूनाइटेड द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की शुरुआत की गई थी. यह 28 मई को चिह्नित किया जाता है क्योंकि औसतन महिलाओं और लड़कियों को प्रति माह 5 दिन मासिक धर्म होता है और मासिक धर्म चक्र का औसत अंतराल 28 दिनों का होता है. इसलिए 28-5 या 28 मई को दिन को चिह्नित करने के लिए चुना गया था.

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माहवारी सिर्फ लड़कियों और महिलाओं के लिए नहीं है इसके बारे में अपने बच्चों और लडको को भी खुलकर बताना चाहिए। यह सिर्फ महिलाओं और लड़कियों का मुद्दा नहीं है यह सभी का मुद्दा है लडको और पुरुषों को इसके बारे में जानकारी होनी चाहिए और उनको संवेदनशील बनाना होगा तभी वह अपनी भूमिका निभा सके है ।
माहवारी को लेकर समाज में जागरूकता का स्तर तब समझ आता है जब कोई लड़का पैड लेने मेडिकल या दुकान पर चला जाय लोग उसको ऐसे घूरेंगे जैसे उनके घर में किसी को माहवारी कभी आई ही नहीं हो और फिर काली पन्नी या पेपर में ऐसे रैप करके दिया जाता है जैसे उसमे पैड नहीं कोई बम हो या कोई गैर कानूनी वस्तु हो जो कोई देख न ले ऐसे समाज को देखकर बहुत ही कष्ट होता है की पितृसत्तात्मक समाज में महिला स्वास्थ्य से जुड़ी चीजों को किस तरह से छुपाया गया है । हमको इस अंतर्राष्ट्रीय माहवारी दिवस पर इसपर खुलकर चर्चा करने की जरूरत है और इससे जुड़े रूढ़ियों को अब और नही बढ़ावा देना है ।

माहवारी के समय एक विशेष ध्यान और सम्मान की जरूरत होती है महिलाओं और लड़कियों को जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य भी सही रहे और वह खुलकर अपनी बातों को रख सकें।

Friday, January 13, 2023

संविधान उद्देशिका और अर्थ

हमारे भारत का संविधान सबसे लम्बा लिखित संविधान है। जब संविधान बनाया जा रहा था और संविधान सभा का गठन किया जा रहा था तो कई देशों ने भारत को कहा की हम आपका संविधान बनाने में सहायता कर देंगे। लेकीन भारत के लोगों ने जो उस समय भारत के संविधान की मांग कर रहे थे उनका कहना था हम अपना संविधान खुद बनाएंगे इसमें किसी भी बाहरी से मदद नहीं लेंगे भले ही कितने दिन भी लगे।

संविधान किसी देश की आत्मा के समान होती है, यह एक ऐसा रास्ता बताता है जिसपर चलकर देश सुख, समृद्धि और विकास की तरफ अग्रसर होता है। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में डॉक्टर भीम राव अंबेडकर और अन्य महान विचारकों द्वारा मिलकर इस संविधान को तैयार किया गया था। 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ, जिसको बनाने में 2 साल 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।

 
संविधान उद्देशिका

आइए जानते हैं इसमें निहित शब्दों के कुछ सरल अर्थ।

हम भारत के लोग – भारत देश में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे वह भूतकाल का हो या भविष्यकाल में हो या वर्तमान काल में हो जीवित हो या मर चुका हो जिसको भारत की नागरिकता हो वह भारत के लोग कहलाते हैं, चाहे वह किसी जाति, धर्म या वर्ण का हो– मतलब भारत के समस्त नागरिक शामिल हैं दूसरे शब्दों में भारतीय संविधान भारतीय जनता को समर्पित है।


प्रभुत्व सम्पन्न   भारत ना तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और ना ही किसी अन्य देश का डोमिनियन है। इसके ऊपर और कोई शक्ति नहीं है और यह अपने आंतरिक और बाहरी मामलों का निस्तारण करने के लिए स्वतंत्र हैं।


समाजवादी- राज्य इस तरह काम करेगा की अभी को समान अवसर और समान दर्जा मिलेगा, ऐसी संरचना जिसमें उत्पादन के मुख्य साधनों, पूँजी, जमीन, संपत्ति आदि पर सार्वजनिक स्वामित्व या नियंत्रण के साथ वितरण में  समतुल्य सामंजस्य हो।


पंथनिरपेक्ष- यह शब्द राज्य के लिए है की राज्य का कोई धर्म नहीं है। सभी धर्म समान होंगे। राज्य की नजर में सभी धर्म बराबर हैं।


लोकतंत्रात्मक- लोकतंत्रात्मक का अर्थ है अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार वोट देने का अधिकार । अलग- अलग स्तर पर अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार। हर 18 वर्ष से अधिक व्यक्ति को वोट देने का अधिकार और अपनी भागीदारी निभाने का एक महत्वपूर्ण तरीका।


गणराज्यवंशवाद का अंत, राज्य का मुखिया या राष्ट्रपति वंश के अनुसार नही चुना जायेगा। और भारत का कोई भी नागरिक इन चुनाओ में खड़ा हो सकता है ।


स्वतंत्रता- यहाँ स्वतंत्रता का तात्पर्य नागरिक स्वतंत्रता से है। स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल संविधान में लिखी सीमाओं के भीतर ही किया जा सकता है। यह व्यक्ति के विकास के लिये अवसर प्रदान करता है।


न्याय – लोगों को  तीन तरह के न्याय मिल सके जिसमे सामाजिक न्याय, राजनीतिक न्याय व आर्थिक न्याय।


समता – नागरिक को स्थिति और अवसर की क्षमता प्रदान करती हैं जिसका अभिप्राय है समाज के किसी भी वर्ग के लिए विशेषाधिकार की अनुपस्थिति और बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति को समान अवसर प्रदान करने की उपबंध।

बंधुता– भाईचारे की भावना। प्रस्तावना के अनुसार बंधुत्व में दो बातों को सुनिश्चित करना होगा। पहला व्यक्ति का सम्मान और दूसरा देश की एकता और अखंडता। मौलिक कर्तव्य में भी भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।


प्रतिष्ठा और अवसर की समता : इस शब्द का तात्पर्य है कि अतार्किक विशेषाधिकारोँ की समाप्ति, आगे बढ़ने के समान अवसर तथा मानव होने के आधार पर सभी समान हैं।


आत्मार्पित- समर्पित कर देना।


(यह ब्लॉग संविधान के बारे में सिर्फ जानकारी को बढ़ावा देने हेतु एक छोटा सा प्रयास है।)