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हम भारत के लोग – भारत देश में रहने वाला हर व्यक्ति चाहे वह भूतकाल का हो या भविष्यकाल में हो या वर्तमान काल में हो जीवित हो या मर चुका हो जिसको भारत की नागरिकता हो वह भारत के लोग कहलाते हैं, चाहे वह किसी जाति, धर्म या वर्ण का हो– मतलब भारत के समस्त नागरिक शामिल हैं दूसरे शब्दों में भारतीय संविधान भारतीय जनता को समर्पित है।
प्रभुत्व सम्पन्न – भारत ना तो किसी अन्य देश पर निर्भर है और ना ही किसी अन्य देश का डोमिनियन है। इसके ऊपर और कोई शक्ति नहीं है और यह अपने आंतरिक और बाहरी मामलों का निस्तारण करने के लिए स्वतंत्र हैं।
समाजवादी- राज्य इस तरह काम करेगा की अभी को समान अवसर और समान दर्जा मिलेगा, ‘ऐसी संरचना जिसमें उत्पादन के मुख्य साधनों,
पूँजी, जमीन, संपत्ति आदि पर सार्वजनिक स्वामित्व या
नियंत्रण के साथ वितरण में समतुल्य सामंजस्य हो।
पंथनिरपेक्ष- यह शब्द राज्य के लिए है की राज्य का कोई धर्म नहीं है। सभी धर्म समान होंगे। राज्य की नजर में सभी धर्म बराबर हैं।
लोकतंत्रात्मक- लोकतंत्रात्मक का अर्थ है अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार वोट देने का अधिकार । अलग- अलग स्तर पर अपने प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार। हर 18 वर्ष से अधिक व्यक्ति को वोट देने का अधिकार और अपनी भागीदारी निभाने का एक महत्वपूर्ण तरीका।
गणराज्य- वंशवाद का अंत, राज्य का मुखिया या राष्ट्रपति वंश के अनुसार नही चुना जायेगा। और भारत का कोई भी नागरिक इन चुनाओ में खड़ा हो सकता है ।
स्वतंत्रता- यहाँ स्वतंत्रता का तात्पर्य नागरिक स्वतंत्रता से है।
स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल संविधान में लिखी सीमाओं के भीतर ही किया जा
सकता है। यह व्यक्ति के विकास के लिये अवसर प्रदान करता है।
न्याय – लोगों को तीन तरह के न्याय
मिल सके जिसमे सामाजिक न्याय,
राजनीतिक न्याय व आर्थिक न्याय।
समता – नागरिक को स्थिति और अवसर की क्षमता प्रदान करती हैं जिसका
अभिप्राय है समाज के किसी भी वर्ग के लिए विशेषाधिकार की अनुपस्थिति और बिना किसी
भेदभाव के हर व्यक्ति को समान अवसर प्रदान करने की उपबंध।
बंधुता– भाईचारे की भावना। प्रस्तावना के अनुसार बंधुत्व में दो बातों को सुनिश्चित
करना होगा। पहला व्यक्ति का सम्मान और दूसरा देश की एकता और अखंडता। मौलिक कर्तव्य
में भी भाईचारे की भावना को प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।
प्रतिष्ठा और अवसर की समता : इस शब्द का तात्पर्य है कि अतार्किक विशेषाधिकारोँ की समाप्ति, आगे बढ़ने के समान अवसर तथा मानव होने के आधार पर सभी समान हैं।
आत्मार्पित- समर्पित कर देना।
(यह ब्लॉग संविधान के बारे में सिर्फ जानकारी को बढ़ावा देने हेतु एक छोटा सा प्रयास है।)