Saturday, December 13, 2025

बच्चे के प्रथम 1000 दिवस

मजबूत भविष्य के लिए बच्चों के प्रथम 1000 दिवस है महत्वपूर्ण 

भारत में बच्चों के बचपन और उनके सर्वांगीण विकास पर पहले से कहीं अधिक ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन क्या क्या हम सच में जानते हैं कि बच्चे के जीवन के प्रथम 1000 दिवसयानी 

गर्भधारण (कन्सेप्शन) से लेकर बच्चे के 2 वर्ष की उम्र तक—कितने निर्णायक होते हैं?

लेकिन विज्ञान और शोध कुछ और ही कहते हैं।
अक्सर यह सोच बना ली जाती है कि “बच्चा जैसे-तैसे बचपन पार कर ले, बड़ा होकर खुद सब समझ जाएगा।”


प्रथम 1000 दिवस क्या होते हैं?

प्रथम 1000 दिवस की अवधि में शामिल होते हैं—

  • गर्भावस्था के लगभग 270 दिन
  • जन्म के बाद के पहले 730 दिन (0–2 वर्ष)

यही वह समय है जब बच्चे के शरीर, मस्तिष्क, भावनाओं और व्यवहार की बुनियाद रखी जाती है।

मस्तिष्क विकास से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

  • वैज्ञानिक शोध के अनुसारबच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80% विकास 2 वर्ष की उम्र तक हो जाता है
  • इस दौरान हर सेकंड बच्चे के मस्तिष्क में 10 लाख से अधिक न्यूरल कनेक्शन बनते हैं।
  • शुरुआती अनुभव—देखना, सुनना, छूना, बोलना और महसूस करना—मस्तिष्क की संरचना को आकार देते हैं।

यानी जो अनुभव बच्चा अपने जीवन के शुरुआती दिनों में करता है, वही आगे चलकर उसके सोचने, समझने और व्यवहार करने की दिशा तय करते हैं।

इस फोटो को बनाने में AI की सहायता ली गई है 

 अगर किसी बच्चे को 0 से 6 वर्ष की उम्र तक प्यार, अपनापन, सुरक्षा और संवेदनशील देखभाल मिलती है, तो—

  • वह आत्मविश्वासी बनता है
  • दूसरों के प्रति सहानुभूति रखता है
  • परिवार और समाज में सकारात्मक संबंध बना पाता है

इसके विपरीत—

  • उपेक्षा
  • हिंसा
  • भावनात्मक असुरक्षा
  • या तनावपूर्ण वातावरण

बच्चे के मानसिक विकास को गहराई से प्रभावित करता है, जिसका असर जीवन भर देखा जा सकता है।

पोषण: शारीरिक ही नहीं, मानसिक विकास की कुंजी

प्रथम 1000 दिवस में सही पोषण अत्यंत आवश्यक है—

  • गर्भावस्था के दौरान माँ को पर्याप्त आयरन, फोलिक एसिड, कैल्शियम और प्रोटीन मिलना चाहिए।
  • जन्म के बाद पहले 6 माह तक केवल स्तनपान बच्चे को संक्रमण से बचाता है और मस्तिष्क विकास में सहायक होता है।
  • 6 माह बाद पूरक आहार (घर का पौष्टिक भोजन) देना अनिवार्य है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार—

कुपोषण के कारण बच्चे की सीखने की क्षमता और उत्पादकता जीवन भर प्रभावित हो सकती है।

क्यों ज़रूरी है प्रथम 1000 दिवस पर ध्यान?

  • भारत में आज भी बड़ी संख्या में बच्चे स्टंटिंग (कम लंबाई) और अल्पपोषण से प्रभावित हैं।
  • शुरुआती देखभाल की कमी के कारण बच्चों की शैक्षणिक क्षमता और स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर पड़ता है।

इसीलिए सरकार की योजनाएँ जैसे—

  • पोषण अभियान
  • आंगनवाड़ी सेवाएँ
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम

प्रथम 1000 दिवस को केंद्र में रखकर बनाई गई हैं।

आज की देखभाल, कल का सशक्त भारत

प्रथम 1000 दिवस केवल बच्चे के जीवन का शुरुआती चरण नहीं हैं, बल्कि यह उसके पूरे भविष्य की नींव हैं।
यदि इस समय में बच्चे को—

  • सही पोषण
  • प्यार और सुरक्षा
  • स्वास्थ्य सेवाएँ
  • सकारात्मक वातावरण

मिल जाए, तो वह एक स्वस्थ, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकता है।

ध्यान रहे - 
बच्चे को “बड़ा होकर समझ आने” के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।
उसके भविष्य की दिशा आज, इसी समय तय होती है।