Tuesday, January 27, 2015

Basant Panchami


बसंत पंचमी का जिक्र करते ही हमारे मन मे बदलते मौसम का ख्याल आता है या यूं कह ले की सर्दि से निजाद मिलने का आभास हो जाता है (यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है ) क्यूकि बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है जिसको हम ऋतुराज के नाम से जानते है जी हाँ बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा होता है।



 इस दिन से प्रकृति के सोंदर्य मे निखार दिखने लगता है ।पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते है और उनके नये गुलाबी रंग के पत्ते मन को मुग्ध करते है ,बसंत पंचमी को हम अलग अलग तरह से मानते है ।इस दिन को बुद्धि ,ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करके मानते हैं। लेकिन इस बसंत पंचमी की बात करे तो सर्दियों के कारण कुछ फीका जरूर पड़ गया लेकिन इसका ये मतलब नही की बसंत पंचमी को लोगों ने हल्के मे लिया हो ।

इस दिन को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप में भी मनाते हैं । इसका अपना एक अलग ही महत्व है , ये दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इस दिन हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है। और बसंत ऋतु के आने की खुशी मे हम पीले वस्त्र धारण करते है जिसको शुभ माना जाता है ।


हमारे देश में कई स्थानों पर पतंग उड़ाकर ये उत्सव मनाया जाता है, हाँलांकि ये परंपरा भारत में कुछ ही हिस्सो मे है । और जैसा की हम सब जानते है की बसंत ऋतु घूमने फिरने और खाने पीने के लिए उपयुक्त माना जाता है यानि की पूरा माह आनंद के लिए उपयुक्त होता है तभी तो बसंत को ऋतुराज कहा जाता है ।