बसंत पंचमी का जिक्र करते ही हमारे मन मे बदलते मौसम का ख्याल आता है या यूं कह ले की सर्दि से निजाद मिलने का आभास हो जाता है (यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है ) क्यूकि बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है जिसको हम ऋतुराज के नाम से जानते है जी हाँ बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा होता है।
इस दिन को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप में
भी मनाते हैं । इसका अपना एक अलग ही महत्व है , ये दिन विद्यार्थियों के लिए
बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इस दिन हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते
है। और बसंत ऋतु के आने की खुशी मे हम पीले वस्त्र धारण करते है जिसको शुभ माना जाता
है ।
हमारे देश में कई स्थानों पर पतंग उड़ाकर ये
उत्सव मनाया जाता है, हाँलांकि ये परंपरा भारत में कुछ ही हिस्सो मे है । और जैसा की
हम सब जानते है की बसंत ऋतु घूमने फिरने और खाने पीने के लिए उपयुक्त माना जाता है
यानि की पूरा माह आनंद के लिए उपयुक्त होता है तभी तो बसंत को ऋतुराज कहा जाता है ।
