Monday, October 5, 2015

ये है राजनीती




हमारा देश भारत जहाँ एक तरफ हम नई उचाइयों को छू रहा है पूरे और पूरे विश्व में महाशक्ति बनने की इच्छा जाहीर कर चुका है , वही देश की राजनीति न जाने देश को क्या देना चाहती है ?
क्या हर बात पे राजनीति करना अब हमारे देश के नेताओ और विपछी दलों को सोभा देता है ।
कोई कहता है की काम नही हो रहा कोई कहता है की किसानों का हक छीना जा रहा वो ये बताए की उन्होने क्या किया ?








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क्या अब कुर्सी के लिए हमारे राजनेता किसी भी हद तक गिरने को तैयार है । अरे इन लोगों ने जब संसार के सबसे पवित्र बंधन माँ और बेटे पे राजनीति कर डाली तो अब आप ये अनुमान लगा सकते है की राजनीति कहाँ और किस दिशा मे जा रही । हमारे प्रधान मंत्री के अमेरिका दौरे पर पूछे गए एक सवाल मे माँ को लेकर भाऊक हो जाना उसको भी कुछ नेता राजनीति से जोड़ कर देख रहे है ।क्या वे इतना गिर गए की माँ के नाम ओपर भी राजनीति कर डाली ।आखिर अगर कोई काम करता है तो उसका हाथ क्यो पकड़ लिया जाता आखिर किसी को सही ढंग से काम क्यू नही करने दिया जाता ।




कितने शर्म की बात है अरे जब बोलने को कुछ नहीं है तो शांत ही रहे कम से कम अपना स्तर और नीचा तो न करे ।अभी अहल ही में देश की राजधानी से कुछ ही दूर पे हुई दादरी मे अफवाहों को लेकर एक व्यक्ति की हत्या को एक हफ्ते हो गये है। और बाकी की राजनीति के बारे मे आपको पता ही होगा क्योकि मै  किसी विशेष दल या नेता के विषय मे कुछ खास नही कहना चाहता , लेकिन इस घटना पे विवाद अभी खतम नही हुआ है इस पूरे मामले की राजनीति अब उत्तर प्रदेश से बिहार चुनाव तक पहुच चुका है। और इस बात को लेकर इतनी दिशाहीन राजनीति हो रही है।ये पूरा देश देख रहा है ।किसी ने दादरी को बाबरी से जोड़ दिया तो किसी ने माँस पे बेतुके बयान देकर राजनीति को गंदा किया ।आखिर ये लोग किस जनता को क्या समझते है ?

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21वी सदी मे हमारे राजनेता क्या लोगों को गुमराह कर पाएंगे जो धर्म के नाम पे वोट पाने की फिराक मे लगे हुये है हमारे देश की जनता अब जागरूक हो चुकी है उसको पता है की उसको वोट किसको देना है आखिर ये लोग किसको गुमराह कर रहे है भोलीभाली जनता को या खुद को ये तो बिहार चुनाव का नतीजा ही बताएगा ।फिलहाल हम सिर्फ इतना चाहते है की देश मे साफ सुथरी राजनीति हो ।बस राजनीति की सियासत बन्द होनी चाहिए कोई भी किसी को भी कुछ बोल देता है अपशब्दों का प्रयोग बन्द होना चाहिए और अगर नही होता है तो हमारे देश की जनता को अब तो जागना ही होगा आखिर कब तक ऐसे लोगो को चुन कर अपने देश की राजनीति का मज़ाक बनाएँगे ।


Tuesday, January 27, 2015

Basant Panchami


बसंत पंचमी का जिक्र करते ही हमारे मन मे बदलते मौसम का ख्याल आता है या यूं कह ले की सर्दि से निजाद मिलने का आभास हो जाता है (यह दिन नवीन ऋतु के आगमन का सूचक है ) क्यूकि बसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु का आगमन होता है जिसको हम ऋतुराज के नाम से जानते है जी हाँ बसंत ऋतु ऋतुयों का राजा होता है।



 इस दिन से प्रकृति के सोंदर्य मे निखार दिखने लगता है ।पेड़ों के पुराने पत्ते झड़ जाते है और उनके नये गुलाबी रंग के पत्ते मन को मुग्ध करते है ,बसंत पंचमी को हम अलग अलग तरह से मानते है ।इस दिन को बुद्धि ,ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करके मानते हैं। लेकिन इस बसंत पंचमी की बात करे तो सर्दियों के कारण कुछ फीका जरूर पड़ गया लेकिन इसका ये मतलब नही की बसंत पंचमी को लोगों ने हल्के मे लिया हो ।

इस दिन को माँ सरस्वती के जन्मदिन के रूप में भी मनाते हैं । इसका अपना एक अलग ही महत्व है , ये दिन विद्यार्थियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होता है इस दिन हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा अर्चना करते है। और बसंत ऋतु के आने की खुशी मे हम पीले वस्त्र धारण करते है जिसको शुभ माना जाता है ।


हमारे देश में कई स्थानों पर पतंग उड़ाकर ये उत्सव मनाया जाता है, हाँलांकि ये परंपरा भारत में कुछ ही हिस्सो मे है । और जैसा की हम सब जानते है की बसंत ऋतु घूमने फिरने और खाने पीने के लिए उपयुक्त माना जाता है यानि की पूरा माह आनंद के लिए उपयुक्त होता है तभी तो बसंत को ऋतुराज कहा जाता है ।