Saturday, October 25, 2014

अगला हाथ हमारा

भारत में  हर साल सड़क दुर्घटना मे लाखों लोग मारे जाते हैं । और एक समाचार पत्रिका के अनुसार भारत मे एक साल मे दस लाख से भी ज्यादा मौते सड़क दुर्घटना मे होती हैं ,ये एक चिंता का विषय है इसको हमें गंभीर रूप से लेना होगा । 



पिछले कुछ सालों मे वाहनों की तादात में  इजाफा हुआ है जिसके कारण यह आकड़ा तेजी से बढ़ा है ।
इसका कारण है की शराब पी कर वाहन चलना ,यातायात नियमों का पालन ना करना , मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते समय करना और रफ्तार मे ओवरटेक करने की कोशिश करना । 




लेकिन क्या कोई और कारण नही है ? क्या इससे होने वाली मौतों को हम कम कर सकते है? जी हाँ बिल्कुल कर सकते है अक्सर ये देखा जाता है की सड़क पर कोई हादसा हो जाता है और कोई इंसान जिसका एक्सीडेंट हो गया वो सड़क पर तड़पता रहता है और उसकी मदद करने के लिए कोई भी नही आता लेकिन लोग वहा इकट्ठा होकर पुलिस या एम्ब्युलेन्स आने का इंतज़ार करते है ।लगभग 90% लोग सिर्फ तमाशा ही देखते है सिर्फ  10% लोग ऐसे होते है जो मदद को आगे आते है क्या आपने कभी सोचा है की आपके एक हौसले भरे कदम से किसी की जान भी बच सकती है । 







एक्सीडेंट के बाद प्राथमिक उपचार से भी जान बच सकती है, नहीं ट्रामा सेंटर लेकिन पास के किसी अस्पताल तक तो ले जा सकते हैं, या फिर पुलिस और एम्ब्युलेन्स बुलाने मे आप मदद कर  सकते है । तो आखिर हम क्यूँ किसी का इंतजार करते है ? खुद क्यूँ नहीं आगे आते आखिर कब तक हम एक दूसरे को ब्लेम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी को खुद समझना होगा और आगे आकर हेल्प करना होगा । तो आज ही आपको  ये तय कर लेना चाहिए की जो पहला मदद  का हाथ हो वो आपका हो । 
(फोटो इंटरनेट..)

Monday, October 20, 2014

आगाज हो चुका है



क्या एक बड़े बदलाव बिगुल बज गया है ? मै आज बात कर रहा हूँ, भारतीय राजनीति की जहाँ कितने सालों के बाद एक बदलाव देखने को मिला हैं, लोकसभा चुनाव मे पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बाद अभी हाल ही मे हुये हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा के चुनावों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे उभर  कर सामने आई है, और इससे ये साफ झलकता है की लोकसभा चुनाव के पाँच महीने बाद भी मोदी का असर अभी भी लोगों पे बरकरार है। हालांकि ये बात तो सच है की महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन तोड़ अपने दम पर सरकार बनाने का सपना तो साकार नही हो पाया, लेकिन इसको भी नकारा नही जा सकता की उद्धव ठाकरे के अहंकार को करारा जवाब मिला है । 


आज जनता ये जान चुकी है की किसको चुनना है , हालांकि एनसीपी ने भाजपा को बाहर से समर्थन देने का एलान स्पष्ट कर दिया है की काग्रेस से अलग यू ही नही हुये थे, नरेंद्र मोदी के सघन प्रचार के बाद भी आखिर अस्सी से अधिक सीटे ले आई है । लेकिन उधर हरियाणा मे जुरुर भाजपा की ये के शानदार जीत है , जिस राज्य मे भाजपा ने कभी बिना सहयोगी दल के बगैर चुनाव लड़ा ही न हो और लड़ा भी तो भी इतनी उत्साह जनक सफलता नही मिल रही हो, वहा अकेले दम पर सभी सीटो पर चुनाव लड़ कर पर्याप्त मात्रा(47 सीटे ) मे सीटे जीतना कोई आम बात नही है ये भी एक चमत्कार ही है ।


इसमे कोई दो राय नही है की हरियाणा में काग्रेस की पराजय का कारण उसकी खराब छवि और सत्ता विरोधी मोदी लहर जिम्मेदार है मोदी लहर का एक प्रमाड़ तो यही है की मुख्यमंत्री का चेहरा सामने न रखकर भी इतनी शानदार जीत हासिल की है । इनोले प्रमुख का जमानत पर बाहर आकर चुनावी रैली करना किसी काम नही आया,हरियाणा का ये चुनाव नतीजा सभी स्थानीय पार्टियो के लिए एक चेतावनी है ,जो अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए जाती वाद और छेत्रवाद का सहारा लेती रहती है हरियाणा के मतदाताओ ने इस तरह की राजनीति को नकार कर बदलाव की तरफ वोट दिया है । 


लिहाजा ये भाजपा और उनकी पार्टी वालों के लिए भी एक अग्नि परीक्षा से कम नही उनको भी जनता के विश्वास पर खरा उतरना होगा और  भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन पर ज्यादा ध्यान देना होगा । 

(फोटो इन्टरनेट)