भारत में हर साल सड़क दुर्घटना मे
लाखों लोग मारे जाते हैं । और एक समाचार पत्रिका के अनुसार भारत मे एक साल मे दस
लाख से भी ज्यादा मौते सड़क दुर्घटना मे होती हैं ,ये एक चिंता का विषय है इसको हमें
गंभीर रूप से लेना होगा ।
पिछले कुछ सालों मे वाहनों की तादात में इजाफा हुआ है जिसके कारण यह आकड़ा तेजी से बढ़ा है ।
पिछले कुछ सालों मे वाहनों की तादात में इजाफा हुआ है जिसके कारण यह आकड़ा तेजी से बढ़ा है ।
इसका कारण है की शराब पी कर वाहन चलना ,यातायात नियमों का पालन ना करना , मोबाइल फोन का प्रयोग वाहन चलाते समय करना और रफ्तार मे ओवरटेक करने की कोशिश करना ।
लेकिन क्या
कोई और कारण नही है ? क्या
इससे होने वाली मौतों को हम कम कर सकते है? जी हाँ बिल्कुल कर सकते है अक्सर ये देखा जाता है की
सड़क पर कोई हादसा हो जाता है और कोई इंसान जिसका एक्सीडेंट हो गया वो सड़क पर तड़पता
रहता है और उसकी मदद करने के लिए कोई भी नही आता लेकिन लोग वहा इकट्ठा होकर पुलिस
या एम्ब्युलेन्स आने का इंतज़ार करते है ।लगभग 90% लोग सिर्फ तमाशा ही देखते है सिर्फ
10% लोग ऐसे होते है जो मदद को आगे आते है
क्या आपने कभी सोचा है की आपके एक हौसले भरे कदम से किसी की जान भी बच सकती है ।
एक्सीडेंट के बाद प्राथमिक उपचार से भी जान बच सकती है, नहीं ट्रामा सेंटर लेकिन पास के
किसी अस्पताल तक तो ले जा सकते हैं, या फिर पुलिस और एम्ब्युलेन्स बुलाने मे आप मदद कर सकते है । तो आखिर हम क्यूँ किसी का इंतजार
करते है ? खुद क्यूँ नहीं आगे आते
आखिर कब तक हम एक दूसरे को ब्लेम करेंगे हमें अपनी ज़िम्मेदारी को खुद समझना होगा
और आगे आकर हेल्प करना होगा । तो आज ही आपको
ये तय कर लेना चाहिए की जो पहला मदद का हाथ हो वो आपका हो ।
(फोटो इंटरनेट..)



